वॉशिंगटन। पिछले सप्ताह एक सौर तूफान धरती से टकराया। इसके कारण दुनिया के कई देशों में रंगीन आसमान देखने को मिला है। अब वैज्ञानिकों ने 2025 में एक और विशाल विस्फोट की चेतावनी दी है। हार्वर्ड के एक खगोलभौतिकीविद् ने बताया कि सूर्य अभी अपने सोलर मैक्सिमम यानी सौर अधिकतम तक नहीं पहुंचा है। सूर्य का एक चक्र 11 वर्षों का होता है और सोलर मैक्सिमम इसका सबसे ऊजार्वान बिंदु है, जिसमें अधिक आशांति सूर्य से निकलने वाली ऊर्जा को बढ़ा देती है।

सोलर मैक्सिमम अंतत: अगले साल गर्मी की तपिश में जुलाई 2025 तक होने की उम्मीद है। डेलीमेल की रिपोर्ट के मुताबिक डॉ. जोनाथन मैकडॉवेल ने कहा कि अगले एक या दो साल में हमें बहुत बड़े तूफान देखने को मिल सकते हैं।’ पिछले वीकेंड पर सौर तूफान के कारण (जी5) लेवल की भू-चुंबकीय स्थितियां देखी गई थीं। सौर तूफान सूर्य पर बने एक सनस्पॉट से निकला था। 1859 में कैरिंगटन घटना को जन्म देने वाले सन स्पॉट से भी यह बड़ा था।

कैरिंगटन घटना के दौरान एक शक्तिशाली सौर तूफान पृथ्वी से टकराया था। इससे टेलीग्राफ के तारों में आग लग गई थी। दुनिया भर का संचार काट दिया और यहां तक कि जहांजों के कंपास भी बाधित हो गए थे। अंतरिक्ष मौसम एक्सपर्ट्स का मानना है कि जल्द ही आने वाले बड़े सौर तूफानों का सीधा और बुरा प्रभाव हो सकता है। डॉ. मैकवेल ने कहा कि सैटेलाइट आॅपरेटरों के लिए निश्चित तौर पर यह एक डरावना समय है। जिस तरह सोलर मैक्सिमम है, उसी तरह सोलर न्यूनतम भी होता है। तब गतिविधि सूर्य में काफी कम होती है।

सूर्य पर हो सकते हैं 115 सनस्पॉट
साल 2019 के सौर न्यूनतम के दौरान सूर्य की सतह पर सनस्पॉट की संख्या प्रभावी रूप से शून्य थी। यूएस नेशनल स्पेस वेदर प्रेडिक्शन सेंटर का अनुमान है कि साल 2025 में आने वाले सोलर मैक्सिमम के दौरान सन स्पॉट की संख्या 115 हो सकती है। इन सन स्पॉट से सौर ज्वालाएं और प्लाज्मा के शक्तिशाली विस्फोट निकलते हैं, जिसे कोरोनल मास इजेक्शन कहा जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि सौर तूफान सैटेलाइट और जीपीएस में गड़बड़ी पैदा कर सकता है।

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