
पटना। बिहार विधानसभा के मानसून सत्र का तीसरा दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ गया। बढ़ते अपराध और वोटर वेरिफिकेशन के मुद्दे पर विपक्ष ने आज फिर सदन में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस, राजद और वाम दलों के विधायकों ने विधानसभा के मेन गेट को जाम कर दिया, जिससे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को वैकल्पिक द्वार से सदन में प्रवेश करना पड़ा। विधानसभा अध्यक्ष नंदकिशोर यादव सहित सत्तारूढ़ दल के कई विधायक भी दूसरे दरवाजे से अंदर गए।



प्रदर्शन के दौरान पुलिस और विपक्षी विधायकों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। विपक्ष का आरोप है कि पुलिस जानबूझकर उन्हें परेशान कर रही है और लोकतांत्रिक प्रदर्शन में बाधा डाल रही है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और विधायक राजेश राम खुद क्राइम के मुद्दे से जुड़े पोस्टर लेकर विधानसभा के मुख्य द्वार पर धरने पर बैठ गए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “हम सदन नहीं चलने देंगे। बिहार में जिस तरह का गुंडाराज चल रहा है, उस पर चर्चा जरूरी है। हम कार्य स्थगन प्रस्ताव लाएंगे और यदि सरकार ने इस पर चर्चा नहीं की तो सदन को नहीं चलने देंगे।”
राजेश राम ने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है और नीतीश सरकार इस पर आंखें मूंदे बैठी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनहित के मुद्दों से भाग रही है और विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है।
बिहार विधानसभा में लगातार तीसरे दिन जारी हंगामे से साफ है कि मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ सकता है। विपक्ष जहां अपराध और मतदाता सूची में गड़बड़ियों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है, वहीं सत्ता पक्ष स्थिति को संभालने में जुटा है।
सदन की कार्यवाही आज भी हंगामे के चलते प्रभावित रही और महत्वपूर्ण विधायी कार्य बाधित हुआ।

