पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दो दशकों से अधिक समय का कार्यकाल उनके स्तर पर शुरू की गयी नयी पहल और उनकी उपलब्धियों के लिए भी याद किया जाएगा। नीतीश कुमार ने प्राय: सभी विभागों में नयी सोच के साथ ऐसी-ऐसी योजनाओं को क्रियान्वित किया जो उनके पूर्व के शासनकाल में नहीं दिखा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सबसे महत्वपूर्ण काम यह किया कि उन्होंने लोगों के साथ नियमित संवाद को आरंभ किया। इस क्रम में उन्होंने अपने पहले कार्यकाल से ही जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम को आरंभ किया। मुख्यमंत्री आवास में नियमित रूप से पूर्व में हफ्ते के दो दिन यह आयोजन होता था। मुख्यमंत्री आवास में नीतीश लोगों से उनकी समस्याओं का आवेदन लेते। इसके माध्यम से उन्हें जिले में चल रही गतिविधि की जानकारी मिलती। विभागों से जुड़ी योजनाओं का फीडबैक मिलता और मौके पर समस्याओं का वह समाधान भी करते।संबंधित विभागों के अधिकारियों से नीतीश कुमार ने आम लोगों को सीधे-सीधे मिलवाना शुरू किया। अपनी यात्राओं के दौरान भी मुख्यमंत्री ने भी लोगों के साथ खूब संवाद किया। जीविका समूह की दीदियों के साथ संवाद तो बाद के दिनों मे उनकी हर यात्राओं क एक अभिन्न हिस्सा हो गया।कानून बनाकर लोगों को उनके अथिकार के प्रति सशक्त किया : मु्ख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार का कार्यकाल इस उपलब्धि के लिए भी जाना जाएगा कि उन्होंने कानून बनाकर लोगों को उनके अधिकार के प्रति सशक्त किया। इस क्रम में बिहार लोक सेवाओं के अधिकार अधिनियम का नाम लिया जा सकता है। इस अधिनियम के तहत नियमित रूप अंचल कार्यालयों के माध्यम से मिलने वाली सेवाएं जैसे जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, आवासीय प्रमाण पत्र आदि सेवाओं को आॅनलाइन माध्यम से एक तय अवधि में उपलब्ध कराने की योजना को वैधानिक स्वरूप दिया गया। अधिकारियों की जवाबदेही तय की गयी और तय समय पर सेवा उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में संबंधित अधिकारी पर जुर्माना का प्रविधान किया गया। इसके लिए हेल्पलाइन नंबर भी शुरू किए गए।स्पीडी ट्रायल और बाद में सैप का गठन : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कार्यकाल विधि-व्यवस्था नियंत्रण के लिए भी जाना जाता है। जैसे ही उनकी सरकार बनी उन्होंने अपराधियों के खिलाफ स्पीडी ट्रायल की प्रक्रिया आरंभ करायी। कार की खिड़की से राइफल की नोंक निकालकर चलने वालों के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत कोर्ट में स्पीडी ट्रायल शुरू कराकर सजा दिलाए जाने की प्रक्रिया आरंभ की गयी। ऐसे केस में पुलिस की गवाहूी ही सबसे महत्वपूर्ण होती है। गवाहों के लिए उनके वर्तमान पता-ठिकाने का एक पोर्टल बना और लगातार गवाही हुई और सजा मिली। जिले के पुलिस कप्तानों के कार्य उपलब्धि से इसे जोड़ दिया गया। अपराधियों की लगातार सजा शुरू हो गयी। यह होड़ भी पुलिस कप्तानों में हुई कि किस जिले में एक महीने में कितने अपराधियों को सजा दिलायी गयी। इसका असर विधि-व्यवस्था नियंत्रण पर पड़ा और लोगों में अपराध नियंत्रण को लेकर विश्वास बढ़ा। इसी तरह पुलिस में सैप का गठन भी बड़ा कदम रहा। सेना से रिटायर जवानों को जोड़कर एक पुलिस बल को विधि-व्यवस्था नियंत्रण के काम में लगाया गया। बाद के दिनों मे दूसरे राज्यों ने भी इसे अपनाया।विकास योजनाएं वाया सात निश्चय : नीतीश कुमार द्वारा शुरू किए गए सात निश्चय-1 से सात निश्चय-3 तक विकास योजनाओं के केंद्र में रहा। सात निश्चय-1 के माध्यम से नीतीश कुमार ने उच्च शिक्षा की चाह रखने वाले युवाओं के लिए स्टुडेंट क्रेडिट कार्ड योजना शुरू की। सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 35 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की। हर घर बिजली, हर घर नल का जल, घरों में शौचालय निर्माण तथा प्रदेश के सभी जिलों में इंजीनियरिंग और मेडिकल कालेज खोलने की योजना पर काम आरंभ हुआ। सात निश्चय-2 में इंटर पास अविवाहित महिलाओं को 25000 तथा स्नातक पास महिलाओं को 50 हजार रुपए दिए जाने की योजना पर काम शुरू हुआ। हर खेत तक सिंचाई की व्यवस्था पर काम लिया गया। गांवों में सोलर स्ट्रीट लाइट की योजना आरंभ हुई। सुलभ संपर्कता के तहत बाईपास व फ्लाईओवर निर्माण के काम को योजना में शामिल किया गया। पिछले वर्ष हुए विधानसभा चुनाव के बाद नयी सरकार के गठन के बाद सात निश्चय-3 अस्तित्व में आया जिसमें इज आफ लिविंग से जुड़ी योजनाओं पर काम आरंभ हुआ।

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