रांची । पहलगाम के आतंकी हमले के बाद सुरक्षा की एहतियाती तैयारियों के तहत गृह मंत्रालय के निर्देश पर देश में 244 से ज्यादा स्थानों पर आज नागरिक सुरक्षा मॉक ड्रिल होगा। झारखंड की राजधानी रांची के अलावा जमशेदपुर, बोकारो, गोड्डा, साहिबगंज और गोमिया में मॉक ड्रिल की तैयारियां पूरी हो गई है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, मॉक ड्रिल के लिए विभिन्न शहरों में अलग-अलग समय निर्धारित किया जाएगा। मॉक ड्रिल के तहत महत्वपूर्ण गतिविधियां की जाएंगी। इस दौरान एयर रेड वार्निंग सायरनों का संचालन होगा। यह बड़े खतरे और दुश्मन की गतिविधियों को लेकर अलर्ट जारी करने से जुड़ा कदम है।

नागरिकों और छात्रों को संभावित हमलों की स्थिति में खुद को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक नागरिक सुरक्षा तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस मॉक ड्रिल में क्रैश ब्लैकआउट अहम हिस्सा होगा। इस दौरान चिन्हित किए गए इलाके में बिजली आपूर्ति रोककर पूरी तरह अंधेरा किया जाएगा। इसके तहत दुश्मन की हवाई निगरानी या हमले से शहरों और ढांचों को छिपाने के लिए आपातकालीन प्रोटोकॉल लागू किया जाएगा।

स्कूलों, कॉलेजों, आॅफिसों और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के इस अभ्यास में झारखंड पुलिस, जैप सहित पुलिस के दूसरे बल संवेदनशील क्षेत्रों में मॉक आॅपरेशन कर सकते हैं। किसी भी आपात स्थिति में नागरिकों को तेजी से सुरक्षित स्थानों पर ले जाने का अभ्यास किया जाएगा।

गृह मंत्रालय के इस निर्णय और हालिया उच्चस्तरीय सुरक्षा बैठकों ने यह संकेत दिया है कि भारत पहलगाम हमले के जवाब में एक सख्त सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर सकता है।

हवाई हमले की चेतावनियां कैसे काम करती हैं?
दुश्मन के विमानों के आने की चेतावनी से लोगों को शरण लेने का समय मिल जाता है। दुश्मन के विमानों की हरकत का पता लगाने का काम वायुसेना का है। जैसे ही वायुसेना को दुश्मन के किसी विमान का पता चलता है, सूचना क्षेत्रीय नागरिक सुरक्षा नियंत्रण केंद्रों को भेज दी जाती है- इसके बाद सूचना शहर के केंद्रों तक भेजा जाता है जहां जमीनी कार्रवाई शुरू होती है- वायुसेना सूचना को एक बड़े नक्शे पर अंकित करती है और रक्षात्मक जवाबी कार्रवाई की योजना बनाती है।
चार तरह के होते हैं हवाई हमले की चेतावनी संदेश

पहला हवाई हमला संदेश – ‘येलो’- यह प्रारंभिक एवं गोपनीय संदेश है। यह दुश्मन के विमान की गतिविधि का पूर्वानुमान है। यह संदेश प्राप्त होने पर, नागरिक सुरक्षा सेवाओं को बिना किसी बाधा के आवागमन के लिए तैयार रहना चाहिए। लोग न घबराएं इसलिए इस चेतावनी को गोपनीय रखा जाता है।

दूसरा अलर्ट ‘हवाई हमला मैसेज-रेड’- रेड का संकेत होता है कि दुश्मन के विमान कुछ शहरों की ओर बढ़ रहे हैं। कुछ ही मिनटों में हमला हो सकता है। यह संदेश मैसेज सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े लोगों को भेजकर कार्रवाई करने को कहा जाता है। हवाई हमलों के दौरान आम लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना अहम होता है। इसमें आम लोगों और छात्रों की ट्रेनिंग के साथ-साथ सिविल डिफेंस की अहम भूमिका होती है। इस चेतावनी के बाद सायरन के माध्यम से सार्वजनिक चेतावनी जारी किए जाने की जाती है।

तीसरा अलर्ट ‘एयर रेड मैसेज – ग्रीन’- इस अलर्ट का मतलब है कि हमलावर विमान शहरों से चले गए हैं या अब उन्हें कोई खतरा नहीं है।

चौथा अलर्ट है ‘एयर रेड मैसेज-व्हाइट’– यह अलर्ट ‘एयर रेड मैसेज-व्हाइट’ तब भेजा जाता है जब ‘एयर रेड मैसेज-येलो’ में चेतावनी दी गई प्रारंभिक धमकी का समय बीत जाता है। इस प्रकार का अलर्ट भी गोपनीय होता है।

ब्लैकआउट की जरूरत क्यों होती है?
इसका उद्देश्य लोगों को रात में दुश्मन के विमानों से स्वयं को और अपने शहरों को सुरक्षित रखने में सक्षम बनाना है। ब्लैकआउट से अत्यधिक गति वाले दुश्मन के लड़ाकू विमान को सटीक हमला नहीं कर पाते। इसमें सुनिश्चित किया जाता कि ”सामान्य ²श्यता स्थितियों के तहत जमीन से पांच हजार फीट की ऊंचाई से कोई रोशनी न दिखे। ब्लैकआउट को धीरे-धीरे लागू किया जाएगा, एक साथ नहीं। ये प्रतिबंध स्ट्रीट लाइट, कारखानों और वाहनों की लाइट पर भी लागू होंगे। संवेदनशील क्षेत्रों में विज्ञापनों के लिए लाइट के उपयोग पर प्रतिबंध रहेगा। स्ट्रीट लैंप भी ब्लैकआउट में शामिल होंगे, इसमें प्रकाश को न्यूनतम रखा जाएगा। सड़क पर लगे स्ट्रीट लैंप से कोई भी सीधी किरण नीचे की ओर ढलान पर नहीं निकलनी चाहिए। जमीन पर पड़ने वाली रोशनी 20 फीट की दूरी पर लगे 25 वाट के बल्ब या छह फीट की दूरी पर लगे लैंटर्न से निकलने वाली रोशनी से अधिक नहीं होनी चाहिए। किसी भी इमारत में रोशनी का उपयोग नहीं किया जाए, जब तक कि वह अपारदर्शी सामग्री से ढकी न हो।
प्रकाश के स्त्रोत से सीधे आने वाली या किसी चमकदार सतह से परावर्तित होने वाली कोई भी किरण भवन के छत वाले हिस्से के बाहर दिखाई न दे।
भवन या उसके किसी भी भाग के बाहर ऊपर की ओर कोई चकाचौंध न हो। किसी भी भवन के बाहर सजावट या विज्ञापन के लिए लाइट की अनुमति नहीं दी जाएगी।
वाहनों के लिए नियम
मोटर वाहन की सभी लाइटें ढकी होनी चाहिए, इसके लिए इसमें तीन तरीके बताए गए हैं, पहला तरीका यह है कि ग्लास के ऊपर इस तरह सूखा ब्राउन पेपर रख दिया जाए जिससे हेडलैंप के निचले भाग से हल्की रोशनी निकले। दूसरी विधि यह है कि ग्लास के पीछे एक कार्डबोर्ड डिस्क लगाई जाए तथा बल्ब के केंद्र से आधा इंच नीचे 1/8 इंच चौड़ा क्षैतिज छेद हो।रिफ्लेक्टर को इस तरह से ढंका जाना चाहिए कि रिफ्लेक्टर से कोई प्रकाश परावर्तित न हो।

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