
नई दिल्ली । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागत ने कहा है कि भारत अगले 20 से 30 वर्ष में महाशक्ति बनेगा, भारत विश्वगुरु बनेगा, भारत का विश्वगुरु बनना तय है, लेकिन यह अमेरिका और चीन तक तरह नहीं बनेगा। डॉ. भागवत ने सोमवार को यहां आयोजित बीएमएल मुंजाल पुरस्कार समारोह का संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने भारत का निर्माण: मूल, मूल्य और भविष्य विषय पर बोलते हुए विश्व के विभिन्न क्षेत्र में व्याप्त तनावपूर्व स्थियों पर चिंता व्यक्त की और कहा कि इस समय दुनिया में क्या घटित हो रहा है, यह सब लोग जानते हैं। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया इस समय भारत की ओर देख रही है, क्योंकि वह जानती है कि इसका समाधान भारत के पास है। विश्व के कई देशों ने बहुत कुछ हासिल किया है और दुनिया को दिया भी है, लेकिन इस समस्या का समाधान उनके पास नहीं है, यह वह जानते हैं। भारत के पास वह आध्यात्मिक ज्ञान और दर्शन है जिसकी दुनिया को वर्तमान में सख्त आवश्यकता है।
उन्होंने कहा,’ हमें शक्ति चाहिए, लेकिन शक्ति अगर गलत हाथों में चली जाती है, तो क्या होता है, यह इस समय दुनिया देख रही है।’ उन्होंने कहा कि भारत महाशक्ति बनेगा। भारत विश्वगुरु बनेगा। बनना तय है और आने वाले 20-30 वर्षों में भारत यह मुकाम हासिल कर लेगा। उन्होंने कहा, ‘मुझे जिस विषय पर बोलने के लिए कहा है कि उसमें भारत का निर्माण शब्द शामिल है। भारत का निर्माण’वाक्यांश में‘निर्माण’शब्द मुझे थोड़ा परेशान करता है क्योंकि भारत पहले से ही बना हुआ है। हम भारत हैं और भारत शाश्वत है। भारत को समझने के लिए इतिहास में बहुत पीछे जाना होगा। भारत लिखित इतिहास से पहले भी मौजूद था और आज भी मौजूद है।’
उन्होंने कहा कि भारत ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं और लंबे समय तक विदेशी शासन के बावजूद रहने के बाद भी बचा रहा। क्या यह कोई पुराना भारत है जो प्राचीन काल से चला आ रहा है? नहीं। गंगा हज़ारों सालों से बह रही है। उस अर्थ में, यह प्राचीन है, लेकिन इसमें बहने वाला पानी हमेशा नया होता है। गंगा शाश्वत भी है और हमेशा नयी भी होती रहती है। इसी तरह, भारत शाश्वत है और लगातार खुद को नया कर रहा है। रास्ता वही रहता है, लेकिन पीढि़यां बदलती रहती हैं।
संघ प्रमुख ने कहा, ‘पीढि़यां बदलती रहती हैं और आगे बढ़ती रहती हैं, लेकिन वे उसी रास्ते पर चलती रहती हैं। भारत सिफऱ् एक भौगोलिक जगह का नाम नहीं है। यह एक रास्ते और जीवन जीने के तरीके का नाम है। भारत को समझने के लिए यह समझना होगा कि यह मूल स्वभाव कैसे बना।’ उन्होंने कहा, ‘इंसानों और जानवरों की बुनियादी ज़रूरतें एक जैसी होती हैं।
खाना, सोना, डर और प्रजनन – ये सब इंसानों और जानवरों में एक जैसे होते हैं, लेकिन जो चीज़ इंसानों को अलग बनाती है, वह है‘धर्म‘। हालाँकि हमारी भौतिक ज़रूरतें जानवरों जैसी ही होती हैं, लेकिन इंसानों को सोचने और तकर् करने की क्षमता मिली है। उस सोचने की क्षमता और अपनी कोशिशों से हमने‘धर्म’नाम का एक खास गुण हासिल किया है।’ उन्होंने कहा कि धर्म के दो अर्थ हैं व्यवहा और कर्तव्य। विश्व के लिए और विश्व में क्या महत्वपूर्ण है यह ज्ञान करा दे वह धर्म है।

