श्रीनगर। आॅपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना ने सिर्फ जैश-ए-मोहम्मद का बहावलपुर स्थित मुख्यालय ही नष्ट नहीं किया है, बल्कि गुलाम जम्मू कश्मीर में स्थित उसके प्रमुख कैंप सैयदना बिलाल मरकज को भी बर्बाद कर दिया है।यह वही कैंप है, जहां हिजामा सेंटर और एक बड़े मदरसे की आड़ में पाकिस्तानी सेना के स्पेशल स्ट्राइक ग्रुप एसएसजी के साथ जिहादियों को जम्मू-कश्मीर में निर्दोष लोगों के कत्ल के लिए सुरक्षाबलों पर हमलों के लिए विशेष ट्रेनिंग दी जाती है। नगरोटा में 2016 में सैन्य शीविर पर हुए जैश के आत्माति हमले मे लिप्त आतंकियों को भी यहीं पर प्रशिक्षण मिला था। कठुआ में गत वर्ष घुसपैठ करने और बिलावर में सैन्य दल पर हमला करने वाला आतंकी दस्ते को भी यहीं पर ट्रेनिंग मिली थी।

संबंधित सूत्रों के अनुसार, गुलाम जम्मू कश्मीर में मुजफ्फराबाद के पास स्थित सैयदना बिलाल मरकज, पाकिस्तान और गुलाम जम्मू कश्मीर में स्थित जैश के सभी कैंपों में तीसरे नंबर पर माना जाता है। यह गुलाम जम्मू कश्मीर में जैश-ए-मोहम्मद का सबसे बड़ा केंद्र अथवा जिहादी कैंप था।

लगभग 25 से 30 कनाल में फैले इस कैंप में एक मस्जिद के अलावा आवासीय क्वार्टर, मदरसा और जैश के चैरिटी विंग अल-रहमत ट्रस्ट का कार्यालय भी है। इसमें एक तीन मंजिला इमारत है, जिसमें दिखावे के लिए हिजामा सेंटर चलाया जाता है।

हिजामा एक प्राचीन चिकित्सा पद्धति है, जिसमें शरीर के विभिन्न भागों पर कप लगाकर उपचार किया जाता है। इसे कपिंग थैरेपी भी कहा जाता है। हिजामा सेंटर के ऊपरी मंजिल पर उन आतंकियों को ठहराया जाता था, जिन्हे जम्मू कश्मीर में किसी विशेष हमले के लिए तैयार करने के बाद भेजा जाना होता था। इसमें हमेशा 100 के करीब आतंकी हमेशा मौजूद रहे थे।

ऐसे मिली जिहादी फैक्ट्री के बारे में जानकारी : संबंधित सूत्रों ने बताया कि जम्मू के निकट नगरोटा में सैन्य प्रतिष्ठान पर नवंबर 2016 में जो आतंकी हमला हुआ था, उसका षडयंत्र सैयदना बिलाल मरकज में ही रचा गया था। इस हमले में सात सैन्यकर्मी वीरगति को प्राप्त हुए थे और तीन आतंकी मारे गए थे। इस हमले में लिप्त आशिक हुसैन बाबा जिसे पुलिस ने श्रीनगर से पकड़ा था, ने पूछताछ में इसी जिहादी फैक्टरी के बारे में जानकारी दी थी। उन्होंने बताया कि मई 2016 में बारामूला में पुलिस ने जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी अब्दुल रहमान उर्फ साद को पकड़ा था।
उसके पास से आधार कार्ड भी मिला था। उसने वर्ष 2015 में कुपवाड़ा में घुसपैठ की थी और कुछ समय कुपवाड़ा में सक्रिय रहने के बाद वह बारामूला में जैश के आत्मघाति दस्ते के लिए स्थानीय लड़कों को तैयार कर रहा था। उसने अपनी पूछताछ में बताया था कि बालाकोट और सैयदना बिलाल मरकज में ट्रेनिंग की है।

बिलाल मरकज के बारे में अहम जानकारी : उन्होंने बताया कि जून 2024 में जिला कठुआ के सैडा इलाके में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया आतंकी रेहान अली उर्फ अली असलम भी सैयदना बिलाल मरकज से ही निकला था। उसके पास से जो सामान मिला था, उसमें सैयदना बिलाल मरकज के बारे में कई अहम जानकारियां मिली थीं। उनके आधार पर कहा जाता है कि बिलावर और डोडा में सैन्य दल पर हमला करने वाले आतंकियों को सैयदना बिलाल मरकज में ही पाकिसतानी सेना के एसएसजी दस्ते ने ट्रेनिंग दी है। क्योंकि इन आतंकियों ने हमले में जिस तरह की रणनीति अपनाई, वह आम सैनिकों जैसी नहीं है।

लड़ चुका है रूसी और अमेरिकी फौज के खिलाफ : उन्होंने बताया कि सैयदना बिलाल मरकज की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसकी कमान मुफ्ती असगर खान कश्मीरी ने संभाल रखी थी। इसके अलावा इसमें अब्दुल्ला जिहादी उर्फ अब्दुल्ला कश्मीरी और आशिक नेंगरू जैसे आतंकी कमांडर भी अक्सर मौजूद रहते थे।


आशिक नेंगरू पुलवामा का रहने वाला है और पुलवामा कांड व बन टोल प्लाजा में आतंकी हमले में वांछित है। मुफ्ती असगर खान कश्मीरी को जैश सरगना अजहर मसूद के विश्वस्तों में गिना जाता है। वह अफगानिस्तान में तालिबान और अल-कायदा कैडर के साथ मिलकर रूसी और अमेरिकी फौज के खिलाफ भी लड़ चुका है।
आशिक नेंगरू ने बीते चार वर्ष के दौरान उत्तरी कश्मीर के उड़ी और जम्मू प्रांत के सांबा-रामगढ़ व हीरानगर सेक्टर में ड्रोन के जरिए हथियार व अन्य साजो सामान भी भेजा है।

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