ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर के प्रसिद्ध सिंधिया राजघराने की 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति के बंटवारे से जुड़े बहुचर्चित मामले में गुरुवार को अतिरिक्त जिला न्यायाधीश (एडीजे) की अदालत में सुनवाई होनी थी, लेकिन संबंधित न्यायाधीश के अवकाश पर होने के कारण सुनवाई टल गई। अब अगली सुनवाई की 04 नवंबर को तय की गई है।

दरअसल, राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, मध्य प्रदेश की पूर्व मंत्री यशोधरा राजे और उनकी बहन उषा राजे ने अपने भतीजे केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से पैतृक संपत्ति में अपना हिस्सा पाने के लिए सिविल सूट दायर किया था। लंबे कानूनी विवाद के बाद दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से राजीनामा तैयार कर न्यायालय में पेश किया था। मूल दावे में दिवंगत बड़ी बुआ पद्मावती राजे की दोनों बेटियों कनिका देवी सिंह और प्रतिमा देवी राना को पक्षकार बनाया गया था। हालांकि, पूर्व में सुनवाई के दौरान उपस्थित नहीं होने के कारण अदालत ने उन्हें ‘एक्स पार्टी’ (एकपक्षीय) घोषित कर दिया था।

इस पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की दिवंगत बड़ी बुआ पद्मावती राजे सिंधिया की बेटी प्रतिमा देवी (जो कि नेपाल के राणा परिवार में विवाहित हैं) ने इसमें आपत्ति दर्ज कराई थी। प्रतिमा देवी ने समझौता प्रस्ताव पर हस्ताक्षर अपनी सहमति से नहीं बल्कि धोखाधड़ी से कराए जाने का आरोप लगाया है। उनके आरोपों के केंद्र में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, पूर्व मंत्री यशोधरा राजे और उषा राजे हैं।

इसी आरोप के बाद मामले में हलचल तेज हो गई थी। न्यायालय ने प्रतिमा देवी का आवेदन स्वीकार कर उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिया है। उन्हें अपने आरोपों के समर्थन में साक्ष्य भी पेश करने हैं। इससे पहले 14 अक्टूबर को हुई सुनवाई में अदालत ने साक्ष्य पेश करने की अनुमति देते हुए मामले की सुनवाई आगे बढ़ाई थी।

पिछली सुनवाई अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आत्माराम टांक की न्यायालय में हुई थी। अदालत ने मामले में अंतरिम आवेदनों और आपत्ति पर दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद ने तय किया था कि 29 अक्टूबर 2026 को प्रतिमा देवी राना की गवाही होगी। उन्हें समझौता प्रस्ताव पर हस्ताक्षर धोखाधड़ी से कराए जाने के अपने आरोपों के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे। उन्हें अदालत में गवाही देकर यह बताना होगा कि समझौते पर हस्ताक्षर किन परिस्थितियों में हुए और किन आधारों पर वह इसे धोखाधड़ी का मामला मानती हैं।

इधर, प्रतिमा देवी की आपत्ति का वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और उषा राजे की ओर से विरोध किया गया। उनके पक्ष का कहना है कि समझौता प्रस्ताव पर हस्ताक्षर आपसी सहमति से किए गए थे। हस्ताक्षर के बाद परिवार के सदस्यों ने साथ में डिनर किया था और तस्वीरें भी खींची गई थीं। ऐसे में उनके अनुसार, हस्ताक्षर धोखाधड़ी से नहीं कराए गए। वहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से कहा गया कि हस्ताक्षर सहमति से किए गए थे और इसके लिए साक्ष्य की जरूरत नहीं है। इस तरह दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं।

गुरुवार को समझौता प्रस्ताव पर आपत्ति दर्ज कराने वाली ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ पद्माराजे की बेटी प्रतिमा राणा के बयान दर्ज होने थे, लेकिन अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आत्माराम टांक के छुट्टी पर होने के कारण सुनवाई टल गई।

Share.
Leave A Reply

Exit mobile version