
नई दिल्ली। स्वाधीनता के 80वें समारोह में लालकिला राष्ट्रगीत वंदे मातरम से ओतप्रोत होगा। इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस की मुख्य थीम वंदे मातरम रखी गई है। बड़े-बड़े अक्षरों में वंदे मातरम दर्शकों में जहां भक्ति भाव से पूर्ण करेगा। वहीं, पहली बार स्वतंत्रता दिवस समारोह के मौके पर लाल किला परिसर में वंदे मातरम के सभी छंद के गान लोगों में देशप्रेम के भाव को प्रगाढ़ करेंगे।



पूरा देश वंदे मातरम की 150 वीं वर्षगांठ मना रहा है। साथ ही संसद के मानसून सत्र में वंदे मातरम विधेयक पारित किया गया है, जिसमें राष्ट्रगान से पहले राष्ट्र गीत बजाया जाएगा, उसमें भी सभी छह छंद बजेंगे, जिसमें सभी को सावधान मुद्रा में खड़ा रहना होगा। इस कानून के बाद से लालकिला परिसर में भी स्वतंत्रता दिवस समारोह में राष्ट्रगीत अनिवार्य हो गया है। पहले प्रधानमंत्री द्वारा ध्वजारोहण के साथ अमूमन, राष्ट्रगान ही होता था। अब पहले राष्ट्र गीत का गान होगा।
देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह को लेकर ऐतिहासिक लाल किले पर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। देशभक्ति के इस सबसे बड़े उत्सव को भव्य, सुव्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए संबंधित विभाग दिन-रात तैयारियों में जुटे हुए हैं।
पवित्र नदियों को किया जाएगा नमन : समारोह स्थल पर राष्ट्रीय चेतना का अहसास कराने के लिए लाल किले के मुख्य द्वार पर विशाल अक्षरों में वंदे मातरम अंकित करने की तैयारी है। इसके साथ ही दर्शक दीर्घा को इस बार खास आध्यात्मिक व सांस्कृतिक पहचान दी जा रही है। समारोह में आने वाले अतिथियों और नागरिकों के बैठने के लिए बनाए जा रहे सभी सेक्टरों के नाम देश की प्रमुख नदियों (जैसे गंगा, यमुना, गोदावरी, कावेरी आदि) के नाम पर रखे गए हैं।
समारोह में अतिथियों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। इस बार दर्शक दीर्घा में फोल्डिंग हाइड्रोलिक कुर्सियां लगाई जा रही हैं। यह वही अत्याधुनिक कुर्सियां हैं जिनका उपयोग अब तक गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर किया जाता रहा है। इन्हें आसानी से ला-ले जाकर सेट किया जा सकता है, जिससे व्यवस्था अधिक सुदृढ़ और आरामदायक बनी रहेगी।

