नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को समूची मानवता की भलाई के लिए साझा संसाधन करार देते हुए कहा है कि सभी को मिलकर इसे मानवता के लिए सबसे बड़े अवसर के रूप में बदलने की दिशा में काम करना होगा। श्री मोदी ने गुरुवार को इंडिया एआई इम्पैक्ट सम्मेलन के उद्घाटन के बाद वैश्विक नेताओं के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए विश्वास जताया कि यह सम्मेलन मानव केन्द्रीत और संवेदनशील एआई इकोसिस्टम के निर्माण में अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने इसे एक बड़ा अवसर करार देते हुए इसका भरपूर फायदा उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हम इतिहास पर नजर डालें, तो पता चलता है कि इंसान ने हर बाधा को एक नए अवसर में बदला है। आज हमारे सामने फिर ऐसा ही अवसर आया है। हमें मिलकर इस बाधा को मानवता के सबसे बड़े अवसर के रूप में बदल देना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सही समझ से ही सही परिणाम मिलते हैं इसलिए जरूरी है कि हम साथ मिलकर ऐसा रोडमैप बनाएं जिससे एआई का सही प्रभाव दिखे, और सही प्रभाव तभी होता है, जब हम सही समय पर सही नियत से, सही निर्णय लेते हैं। मोदी ने कहा कि एआई को लेकर भारत की दिशा स्पष्ट है, भारत का विचार स्पष्ट है। एआई पूरी मानवता की भलाई के लिए एक साझा संसाधन है।

उन्होंने कहा कि हमें मिलकर ऐसा एआई भविष्य बनाना होगा, जो नवाचार को आगे बढ़ाएं, समावेशन को मजबूत करे और मानव मूल्यों का समावेश करके आगे बढ़े। जब प्रौद्योगिकी और मानव विश्वास साथ-साथ चलेंगे, तो एआई का सही प्रभाव दुनिया पर दिखेगा। कोविड महामारी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जब हम एक दूसरे के साथ खड़े होते हैं, तो असंभव भी संभव हो जाता है। उन्होंने कहा कि वैक्सीन विकास से लेकर आपूर्ति श्रंखला तक, डेटा साझा करने से लेकर जीवन बचाने तक, सहयोग ने ही समाधान दिया। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी कैसे मानवता की सेवा का माध्यम बन सकती है, ये हमने भारत में कोविड काल में देखा है। हमारा जो डिजिटल वैक्सीनेशन प्लेटफार्म था, उसने करोड़ों लोगों को समय पर वैक्सीनेट कराने में बहुत मदद की। हमारे लिए टेक्नोलॉजी पावर का नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम है, पावर नहीं एंपावर करना। एआई की दिशा भी ऐसी होनी चाहिए, जिससे पूरी मानवता का कल्याण हो। प्रधानमंत्री ने कहा कि एआई प्रौद्योगिकी सबके लिए सुलभ हो सबकी पहुंच में हो यही हमारा लक्ष्य होना चाहिए। इसलिए आज जब हम एआई के फ्यूचर पर चर्चा कर रहे हैं, तो हमें ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं और प्राथमिकताओं को भी एआई गवर्नेंस के केंद्र में रखना होगा।

एआई के इस्तेमाल में नैतिकता पर अत्यधिक जोर देते हुए उन्होंने कहा कि युग चाहे कोई भी रहा हो, एथिक्स हमेशा ही चर्चा के केंद्र में रहा है, अंतर बस इतना आया है कि पहले अनैतिक व्यवहार का दायरा बहुत छोटा होता था, लेकिन एआई में इसका दायरा असीमित है, इसलिए, एआई के लिए हमें नैतिक व्यवाहार और तौर तरीकों का दायरा भी असीमित बनाना होगा। एआई कंपनियों के सामने बहुत बड़ी जिम्मेदारी है, मुनाफे के साथ-साथ उद्देश पर भी फोकस हो, ऐसी नैतिक प्रतिबद्धता की बहुत आवश्यकता है। व्यक्तिगत स्तर पर एआई हमारी लर्निंग, इंटेलिजेंस और इमोशंस को प्रभावित कर रही है। मोदी ने इस संबंध में तीन सुझाव भी दिये। पहला डेटा संप्रभुता का सम्मान करते हुए एआई ट्रेनिंग के लिए एक डेटा फ्रेमवर्क बने। उन्होंने कहा कि अगर डेटा सुरक्षित, संतुलित, विश्वसनीय नहीं होगा, तो परिणाम भी भरोसेमंद नहीं होगा। इसलिए, वैश्विक विशवसनीय डेटा फ्रेमवर्क जरूरी है। दूसरा एआई प्लेटफार्म अपने सुरक्षा संबंधी नियम बहुत स्पष्ट और पारदर्शी रखें इससे जवाबदेही भी स्पष्ट होगी और व्यवसाय में नैतिक आचरण को भी बढावा मिलेगा। तीसरा एआई शोध में स्पष्ट मानव मूल्य और मार्गदर्शन की जरूरत है। उन्होंने कहा एआई शक्तिशाली है लेकिन दिशा हमेशा मानव ही तय करेगा। उन्होंने कहा कि एआई की वैश्विक यात्रा में आकांक्षी भारत की बड़ी भूमिका है, और अपने इस दायित्व को समझते हुए भारत आज बड़े कदम उठा रहा है। भारत के एआई मिशन के माध्यम से आज देश में 38,000 जीपीयू हैं, और अगले 6 महीनों में हम 24,000 जीपीयू और लगाने जा रहे हैं।

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