पटना। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। शहरी विकास, औद्योगिक निवेश और सरकारी सेवाओं को डिजिटल माध्यम से आम लोगों तक पहुंचाने से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। आज की बैठक में 43 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। मंत्रिमंडल की बैठक के बाद कैबिनेट के ऊपर मुख्य सचिव अरविंद चौधरी ने बताया कि पटना में भूमिगत सड़क कॉरिडोर के विकास की संभावनाओं का अध्ययन कराया जाएगा।

वहीं, सोनपुर आयोजना क्षेत्र का विस्तार करने और ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप में जमीन की खरीद-बिक्री पर लगी रोक हटाने का निर्णय लिया गया। मुजफ्फरपुर के मोतीपुर चीनी मिल परिसर की जमीन पर चीनी मिल और अन्य उद्योगों की स्थापना का रास्ता भी साफ किया गया। प्रस्ताव के तहत आर ब्लॉक चौराहे से कंकड़बाग और डाकबंगला चौराहे से पटना वीमेंस कॉलेज समेत शहर के अन्य महत्वपूर्ण स्थलों को भूमिगत मार्गों से जोड़ने की संभावनाओं का अध्ययन किया जाएगा। इस अध्ययन से यह पता लगाया जाएगा कि किन मार्गों पर भूमिगत सड़क कॉरिडोर विकसित करना व्यावहारिक होगा। हालांकि, फिलहाल यह अध्ययन की मंजूरी है, निर्माण कार्य की नहीं।

सोनपुर क्षेत्र का होगा विस्तार: सोनपुर में ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप, अंतरराष्ट्रीय ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे, फिल्म सिटी और शैक्षणिक संस्थानों सहित कई विकास परियोजनाओं पर काम चल रहा है।इसके अलावा इस क्षेत्र में राष्ट्रीय और राज्य स्तर की अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं के आने की भी संभावना है। इसे देखते हुए कैबिनेट ने सोनपुर आयोजना क्षेत्र के विस्तार को मंजूरी दी है। इससे भविष्य की विकास योजनाओं के लिए क्षेत्र का नियोजित विस्तार करने में मदद मिलेगी।

ग्रीनफील्ड टाउनशिप में जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक हटेगी: ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के लिए चयनित क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री और हस्तांतरण पर लगी रोक तत्काल प्रभाव से हटाई जाएगी। कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।हालांकि, टाउनशिप की विकास योजना अधिसूचित होने के बाद भवन निर्माण और भूमि विकास निर्धारित भूमि उपयोग तथा लागू विकास नियंत्रण नियमों (डीसीआर) के अनुसार ही किया जा सकेगा। इस फैसले से चयनित क्षेत्रों में जमीन के लेन-देन पर लगी पाबंदी हटेगी, जबकि निर्माण और विकास के लिए अधिसूचित योजना के प्रावधानों का पालन करना होगा।

मोतीपुर चीनी मिल की जमीन पर स्थापित होंगे उद्योग : मुजफ्फरपुर जिले के मोतीपुर स्थित बंद चीनी मिल की जमीन के औद्योगिक उपयोग को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। बिहार राज्य चीनी निगम की इस इकाई की कुल 266 एकड़ जमीन में से 115.08 एकड़ पर चीनी मिल की स्थापना की जाएगी, जबकि शेष 151.58 एकड़ जमीन उद्योग विभाग को हस्तांतरित की जाएगी। इस जमीन का उपयोग सात निश्चय-3 के तहत समृद्ध उद्योग-सशक्त बिहार कार्यक्रम के उद्देश्य से किया जाएगा। इससे नए उद्योगों की स्थापना और निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

व्हाट्सएप पर मिलेंगी सरकारी योजनाओं और सेवाओं की जानकारी: राज्य के नागरिकों को सरकारी योजनाओं और सेवाओं से जुड़ी जानकारी व्हाट्सएप के माध्यम से उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है। इसके क्रियान्वयन के लिए भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) का चयन किया गया है। योजना पर दो करोड़ 34 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे।

पांच साल में बनेंगे एक करोड़ उद्यमी : कैबिनेट ने बिहार एमएसएमई नीति, 2026 को घटनोत्तर स्वीकृति दे दी है। नीति के तहत पांच वर्षों में एक करोड़ परिवारों को उद्यमी बनाने और एक करोड़ प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित करने का लक्ष्य है। राज्य में साख-जमा अनुपात 75 प्रतिशत तक पहुंचाने, सभी 38 जिलों में एमएसएमई केंद्र खोलने और प्रत्येक जिले में एक औद्योगिक क्लस्टर विकसित करने की योजना है। नीति के तहत उद्यमों को वित्त, बाजार, तकनीक और कौशल विकास में सहायता मिलेगी। बिहार मार्ट और एमएसएमई मंडपम के माध्यम से बाजार तक पहुंच आसान होगी। इससे उद्यमिता और औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। बिहार में बिजली वितरण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 11,096.55 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। मंत्रिपरिषद ने तीन वर्षों में योजना पूरी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके तहत पुराने एलटी केबल और अधिक भार वाले ट्रांसफॉर्मरों की क्षमता बढ़ाई जाएगी। उत्तर बिहार बिजली वितरण कंपनी को 6,066 करोड़ और दक्षिण बिहार बिजली वितरण कंपनी को 5,030.55 करोड़ रुपये मिलेंगे। इसके लिए सरकारी गारंटी पर बैंकों से ऋण लिया जाएगा।

एआई को बढ़ावा देगी सरकार: बिहार में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास और रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए बिहार कृत्रिम बुद्धिमत्ता नीति-2026 लाने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत इस क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों और नए उद्यमों को निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। सरकार खेती, स्वास्थ्य, शिक्षा और शहरी सेवाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग को बढ़ावा देगी।

इसके लिए नए केंद्र, तकनीकी पार्क और आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। नीति के तहत कंपनियों को पूंजी निवेश, ब्याज, बिजली, किराया और रोजगार बढ़ाने पर आर्थिक सहायता दी जाएगी। इससे राज्य में निवेश बढ़ने और युवाओं को रोजगार मिलने की उम्मीद है।

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