
नयी दिल्ली। जमीन के बदले नौकरी से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में पूर्व रेल मंत्री लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी व उनके बेटे तेजस्वी यादव सहित अन्य के खिलाफ राउज एवेन्यू की विशेष अदालत नए सिरे से मामले में दलीलें सुनेगी। बुधवार को विशेष न्यायाधीश प्रशांत कुमार ने कहा कि आरोप तय करने के बिंदु पर नई दलीलें रखने के लिए जांच एजेंसी कुछ और समय चाहती है। अदालत ने ईडी के अनुरोध को स्वीकार करते हुए आरोप पर दलीलों को सुनने के लिए मामले को 14 अक्टूबर के लिए तय कर दिया। इससे पहले, विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने आरोपितों के खिलाफ आरोप तय करने पर सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा था कि अदालत अपना निर्णय सुनाएगी। हालांकि, विशाल गोगने का स्थानांतरण होने के बाद मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश प्रशांत कुमार कर रहे हैं।
ईडी ने 16 मार्च को आरोप पर अपनी दलीलें पूरी कर ली थीं। सीबीआइ की प्राथमिकी के आधार पर ईडी लालू सहित अन्य के खिलाफ मनी लांड्रिंग का मामला शुरू किया था। नौ जनवरी 2026 को विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने सीबीआइ मामले में लालू प्रसाद, उनके परिवार के सदस्यों और अन्य सहित 41 आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के आरोप तय किया था। ग्रुप डी की पोस्ट पर नौकरी दी गई : ईडी ने आरोपपत्र में पूर्व रेल मंत्री लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव, बेटियों मीसा भारती और हेमा यादव, व करीबी सहयोगी अमित कात्याल सहित अन्य को आरोपित बनाया था। आरोप है कि 2004 से 2009 के बीच, भारतीय रेलवे के अलग-अलग जोन में कई लोगों को ग्रुप डी की पोस्ट पर नौकरी दी गई थी।
रजिस्टर्ड पते का इस्तेमाल तेजस्वी यादव ने किया : इसके बदले में उन्होंने रिश्वत के तौर पर अपनी जमीन लालू प्रसाद के परिवार के सदस्यों और ए के इन्फोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की एक जुड़ी हुई कंपनी के नाम कर दी थी। ईडी का आरोप है कि कंपनी ने इस मामले में एक फायदा उठाने वाली कंपनी है और दक्षिण दिल्ली की न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में मौजूद इसके रजिस्टर्ड पते का इस्तेमाल तेजस्वी यादव करते थे।

