
नई दिल्ली,। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को कांग्रेस और इंडी गठबंधन की बैठक को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कांग्रेस पर अपनी गलतियों के लिए माफी मांगने और आत्मचिंतन करने के बजाय भ्रम फैलाने तथा मनगढ़ंत बातें करने का आरोप लगाया। चौहान की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब इंडी गठबंधन ने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर 2 से 8 अक्टूबर तक देशभर में सेव डेमोक्रेसी मार्च का ऐलान किया है।
भाजपा मुख्यालय में पत्रकार वार्ता कर चौहान ने कहा कि कांग्रेस को अपनी गलतियों पर लगातार माफी मांगकर आत्मचिंतन करना चाहिए, लेकिन पार्टी ने जैसे तय कर लिया है कि वह नहीं सुधरेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी अपनी गलतियों पर माफी मांगने के बजाय भ्रम फैला रहे हैं, झूठ बोल रहे हैं और मनगढ़ंत आरोप लगा रहे हैं।
प्रस्तावित सेव डेमोक्रेसी मार्च पर चौहान ने कहा कि यह सेव डायनेस्टी मार्च यानी परिवार बचाओ अभियान है। उन्होंने कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन के आंदोलन की मंशा पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक परिवारों को बचाने का अभियान बताया।
उन्होंने कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी आने वाले चुनावों से पहले ही अपनी हार के बहाने तलाश रही है। चौहान ने पश्चिम बंगाल के चुनावों से पहले राहुल गांधी द्वारा दिए गए बयानों का उल्लेख करते हुए कहा कि राहुल गांधी ने उस समय ममता बनर्जी की गलतियों को भाजपा की संभावित जीत का कारण बताया था।
इंडी गठबंधन की बैठक में कुछ दलों की गैरमौजूदगी पर निशाना साधते हुए चौहान ने कहा कि बैठक से पहले ही गठबंधन के भीतर मतभेद दिखाई देने लगे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि उत्तर प्रदेश जैसे चुनावी राज्य से समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव बैठक में क्यों नहीं हैं।
चौहान ने डीएमके, आम आदमी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों की बैठक में अनुपस्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इंडी गठबंधन की स्थिति ऐसी हो गई है कि कोई एक तरफ है तो कोई दूसरी तरफ। इसी क्रम में उन्होंने दावा किया कि गठबंधन राहुल गांधी को नेता के तौर पर स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है।
कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में राहुल गांधी के कथित तौर पर पार्टी नेताओं से खुद पर भरोसा करने की अपील किए जाने को लेकर भी चौहान ने तंज कसा। उन्होंने कहा कि अगर राहुल गांधी को खुद कांग्रेस में यह कहना पड़ रहा है कि उन पर भरोसा किया जाए तो इससे स्पष्ट है कि कांग्रेस के भीतर ही उन पर भरोसे का सवाल है। राहुल गांधी के इस बयान की रिपोर्ट भी सामने आई है, जिसमें उन्होंने पार्टी के भीतर मौजूद संदेह करने वालों से उन पर विश्वास करने को कहा था।

