
नई दिल्ली। पहलगाम आतंकी हमले के बाद आतंकियों और उनके आकाओं को खत्म करने के लिए सरकार की ओर से उच्च स्तर पर संकल्प दिखाने के बाद सैन्य कार्रवाई के समय को लेकर अटकलें लगनी शुरू हो गई हैं।
इस सिलसिले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बयान ‘काम बहुत बड़ा है और समय कम’ के भी निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। पुराने युद्धों के अनुभवों के आधार पर सैन्य आॅपरेशन मानसून के दौरान होने की उम्मीद नहीं की जा रही है। यानी इसे मानसून से पहले जून तक ही पूरा करना होगा।
1965 का युद्ध मानसून में हुआ था : आजादी के 78 सालों में भारत ने अपनी ओर से एक सैन्य कार्रवाई शुरू की थी, जिसमें पाकिस्तान को हराकर बांग्लादेश को आजाद कराया गया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने मार्च में सेना को सैन्य अभियान शुरू करने को कहा था, लेकिन तत्कालीन सेनाध्यक्ष जनरल मानिक शॉ ने साफ कर दिया था कि सैन्य तैयारी की जरूरत और मानसून को देखते हुए यह नौ महीने के बाद ही शुरू हो पाएगा।
प्रधानमंत्री समय कम वाले बयान को इससे जोड़कर देखने पर मानसून के पहले सैन्य आॅपरेशन को पूरा करने की संभावना ज्यादा दिख रही है। पुरानी लड़ाई में देखें तो सिर्फ 1965 का युद्ध मानसून के बीच शुरू हुआ था। यह अगस्त में शुरू हआ था और मानसून के बीच ही सितंबर में खत्म हो गया। इसमें पाकिस्तान की बुरी हार हुई थी।
