अजय कुमार सिंह
रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी नेतृत्व क्षमता के दम पर राज्य की राजनीति में एक अलग पहचान बनाई है। वह न केवल एक प्रभावशाली राजनेता हैं, बल्कि उनकी जिंदगी और राजनीतिक सफर से जुड़ी कई रोचक बातें भी हैं। हेमंत सोरेन का जन्म 10 अगस्त 1975 को रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में हुआ था। हेमंत सोरेन ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा बोकारो से पूरी की, लेकिन बीआईटी मेसरा रांची में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई अधूरी छोड़ दी।

साल 2009 में बड़े भाई दुर्गा सोरेन की असामयिक निधन के बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़कर जेएमएम की कमान संभाली। यह उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ था, जिसने उन्हें एक इंजीनियरिंग छात्र से झारखंड के सबसे युवा मुख्यमंत्री तक पहुंचाया।

2009 में वे राज्यसभा सांसद बने और फिर दुमका विधानसभा सीट से जीत हासिल की। उसके बाद साल 2013 में वे झारखंड के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने, हालांकि उनका पहला कार्यकाल केवल 17 महीने का रहा।

साल 2019 में जेएमएम, कांग्रेस और आरजेडी गठबंधन की जीत के बाद हेमंत ने दोबारा मुख्यमंत्री पद संभाला। उनके नेतृत्व में सरकार ने आदिवासी कल्याण, ग्रामीण विकास और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर जोर दिया। माईया सम्मान योजना जैसी पहल ने लाखों महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान की।

हेमंत सोरेन का सफर चुनौतियों से भरा रहा है। जनवरी 2024 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उन्हें एक कथित जमीन घोटाले में गिरफ्तार किया, जिसे उन्होंने केंद्र सरकार की राजनीतिक साजिश करार दिया। पांच महीने जेल में बिताने के बाद जून 2024 में झारखंड हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दी। इसी बीच उनकी पत्नी कल्पना सोरेन ने इस दौरान गांडेय सीट से उपचुनाव जीतकर राजनीतिक मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज की।

2024 के विधानसभा चुनावों में जेएमएम-नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन ने 56 सीटें जीतकर शानदार वापसी की और हेमंत ने 28 नवंबर 2024 को चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनके पिता शिबू सोरेन जेएमएम के संस्थापक और झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता रहे, जिनसे उन्होंने राजनीति में आगे बढ़ने की प्रेरणा ली।

हेमंत सोरेन एक खेल प्रेमी हैं और उन्हें साइकिलिंग और क्रिकेट खेलना पसंद है। वे अक्सर साइकिल चलाते हुए देखे जाते हैं, जो उनकी सादगी को दर्शाता है।

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