अमरावती । चंद्रबाबू नायडू अगर फिलहाल किंगमेकर की स्थिति में हैं, तो इसके पीछे कहीं-न-कहीं उनके बेटे नारा लोकेश का बड़ा हाथ है। मंगलगिरी में उन्होंने 39 साल बाद टीडीपी का परचम तो लहराया ही, साथ ही उन्होंने अपनी पार्टी की जीत को गढ़ने के लिए अहम रणनीति भी बनाई। पिछले साल जनवरी में उन्होंने युवा गालम पदयात्रा ( युवाओं की आवाज) शुरू की, जो चुनाव रिजल्ट के लिहाज से बेहद सफल रही। 400 दिन की इस यात्रा में उन्होंने युवाओं से संवाद बनाया। इस मौके का इस्तेमाल उन्होंने लोगों के मुद्दे जानने और उसके आधार पर अपनी पार्टी की नीतियों को दिशा देने में किया। कहा जाता है कि इस दौरान वो रोज कई किलोमीटर चलते थे और जानकार कहते हैं कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा की तरह, ये भी वोटरों से कनेक्ट करने में कामयाब हुई। अपनी पार्टी के लिए उन्होंने एक आक्रामक मेंबरशिप अभियान चलाया और चुनाव प्रचार की कमान संभाली। इस यात्रा के बारे में टीडीपी दावा करती रही है कि उनकी सभाओं में लोगों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया।

उस दौरान भी पर्यवेक्षक ये मान रहे थे कि ये यात्रा लोकेश के लिए खुद को साबित करने का अहम मौका है। प्रबंध सूचना प्रणाली में पढ़ाई कर चुके लोकेश ने इस चुनौती को समझा और चुनाव परिणामों ने बता दिया कि यात्रा से उनकी पार्टी को फायदा हुआ है।

पिछले साल 9 सितंबर को पिता चंद्रबाबू नायडू कौशल विकास घोटाले में लगाए गए कथित आरोप की वजह से न्यायिक हिरासत में लिया गया था, तो सीआईडी ने लोकेश को भी नोटिस थमाया था। उन पर अमरावती इनर रिंग रोड के आदेश को बदल कर लाभ कमाने का आरोप लगा था। उस दौरान लोकेश ने सीएम जगन मोहन के खिलाफ आक्रामक तेवर अख्तियार करते हुए उन्हें मनोरोगी तक कह दिया। लोकेश ने अपनी बात साबित करने के लिए भूख हड़ताल से लेकर कैंडल मार्च तक किया।

नारा लोकेश ने किए बदलाव : राजनीति में दाखिल हुए यूं तो लोकेश को भले ही एक दशक हो गया हो, लेकिन उनकी अपनी कोई खास पहचान अब तक कायम नहीं हो पाई। राजनीति और पिता के मंत्रिमंडल में उनका दाखिला पीछे के दरवाजे से हुआ। बतौर बैकरूम बॉय साल 2017 में उन्हें राज्य मंत्रिमंडल में जगह मिली। उनके जिम्मे पंचायती राज, ग्रामीण विकास और आईटी मंत्रालय सौंपा गया। साल 2015 में उन्हें पार्टी महासचिव का पद दिया गया, उससे दो साल पहले साल 2013 में ही वो पार्टी में औपचारिक तौर पर शामिल हुए थे। साल 2019 में उन्होंने मंगलगिरी से विधानसभा चुनाव लड़ा लेकिन हार गए। इसके बाद उन्होंने लगातार अपनी गंभीर राजनीतिक इमेज बनाने के लिए काम किया। यहां तक की उन्होंने अपनी बॉडी लैंग्वेज और पहनावे में भी बदलाव किया।

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