
नई दिल्ली । भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से धरती पर लौट आए हैं। वह एक्सिओम-4 मिशन पूरा करके साढ़े 22 घंटे की यात्रा के बाद पृथ्वी पर आए हैं। उनकी वापसी का इंतजार पूरे देश को बेसब्री से है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने एक्स पोस्ट करके शुभांशु को वापसी के लिए बधाई दी। शुभांशु शुक्ला भारत के दूसरे अंतरिक्ष यात्री हैं, जो स्पेस मिशन पूरा करके वापसी किए हैं। वह एक्सिओम-4 मिशन पर गए थे। इस मिशन के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण प्रयोग भी किए।



एक्सिओम-4 मिशन में भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला के साथ कमांडर पैगी व्हिट्सन, मिशन एक्सपर्ट पोलैंड के स्लावोज उज्नान्स्की-विस्नीव्स्की और हंगरी के टिबोर कापू भी शामिल हैं। ये ड्रैगन ग्रेस अंतिरक्ष यान भारतीय समयानुसार सोमवार शाम 4:45 बजे अंतरिक्ष स्टेशन से अलग हो गया था। एक्सिओम-4 मिशन का संचालन करने वाली कंपनी स्पेसएक्स ने एक्स पर पूरे शेड्यूल की जानकारी15 जुलाई, 2025 की दोपहर 3 बजे भारतवासियों ने एक ऐतिहासिक पल देखा।
दरअसल, शुभांशु शुक्ला सफलतापूर्वक धरती पर लौट आए हैं. वह 18 दिन की अपनी पहली अंतरिक्ष यात्रा पूरी करके वापस आए हैं, जो एक्सिओम मिशन-4 (Ax-4) का हिस्सा थी. ये मिशन स्पेसएक्स के ग्रेस यान के जरिए हुआ, जिसने कैलिफोर्निया तट के पास प्रशांत महासागर में सुरक्षित लैंडिंग की. शुभांशु का इस मिशन में शामिल होना भारत के अंतरिक्ष इतिहास में एक सुनहरा अध्याय है. इस पूरे सफर में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का झंडा ऊंचा किया और करोड़ों देशवासियों को गर्व से भर दिया.
शुभांशु का वैज्ञानिक मिशन और जबरदस्त वापसी
बता दें शुभांशु 25 जून को फाल्कन 9 रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष की ओर रवाना हुए थे, और अगले दिन ISS (अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन) से जुड़ गए थे. वहां उन्होंने 60 से ज़्यादा वैज्ञानिक प्रयोग किए, जिनमें अंतरिक्ष में फसल उगाना, मानसिक स्वास्थ्य पर असर और मांसपेशियों की हानि जैसे अहम विषय शामिल थे. 14 जुलाई की शाम को ग्रेस यान ISS से अलग हुआ और धरती की ओर लौटने की तैयारी शुरू हुई. डीऑर्बिट बर्न, हीट शील्ड से सुरक्षित एंट्री, पैराशूट के सहारे धीमा पड़ना और आखिर में ‘स्प्लैशडाउन’—हर स्टेप बेहद रोमांचक था। कुछ पल तो ऐसे थे जब यान से संपर्क भी टूट गया था, लेकिन सबकुछ प्लान के मुताबिक हुआ।
अंतरिक्ष यात्री स्पेस से लाए हैं यादगार पल : ग्रेस यान सिर्फ वैज्ञानिक डेटा ही नहीं लाया, बल्कि उसमें 263 किलोग्राम का जरूरी सामान भी था, जिसमें नासा का हार्डवेयर और ISS का कचरा भी शामिल था. लेकिन सबसे खास चीज़ थी शुभांशु के साथ लाया गया भारत का तिरंगा और उनके बेटे का पसंदीदा खिलौना हंस जॉय. ये दिखाता है कि चाहे इंसान कितनी भी ऊंचाइयों तक पहुंच जाए, दिल में परिवार और देश की जगह सबसे ऊपर होती है. इस मिशन के बाकी सदस्यों में अमेरिका की अनुभवी अंतरिक्ष यात्री पैगी व्हिटसन, पोलैंड के स्लावोश उजनांस्की और हंगरी के टिबोर कपु भी शामिल थे।
अब नई उड़ान की तैयारी : धरती पर लौटते ही शुभांशु और उनकी टीम को मेडिकल जांच और पृथकवास में रखा गया है, ताकि उनके शरीर को दोबारा धरती के गुरुत्वाकर्षण के हिसाब से ढालने का समय मिले. ये प्रक्रिया करीब 10 दिन चलेगी. इस दौरान डॉक्टरों की टीम उनकी सेहत पर खास ध्यान दे रही है. शुभांशु ने कहा- अंतरिक्ष में तिरंगा लहराना उनके जीवन का सबसे गर्वभरा पल था. अब भारत के गगनयान मिशन और भविष्य के स्पेस मिशनों के लिए एक नई प्रेरणा मिल चुकी है. देश उम्मीद कर रहा है कि शुभांशु की ये उड़ान भारत की अंतरिक्ष यात्राओं को नई दिशा देगी. दी है।

