रामगढ़। रामगढ़ विधानसभा चुनाव बेहद दिलचस्प रहा। एक तरफ रामगढ़ की जनता ममता की बयार में बह गई, तो दूसरी ओर बड़कागांव सीट को रोशन होने से कोई नहीं रोक सका। भाजपा उम्मीदवार रोशन लाल चौधरी ने शानदार जी हासिल की है। वहीं ममता की नैया बड़ी मुश्किल से पार लगी। उन्हें रामगढ़ की मईयां ने बचा लिया। कांग्रेस उम्मीदवार ममता देवी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी आजसू उम्मीदवार सुनीता चौधरी को 6790 वोट से हराया। ममता देवी को कॉल 89818 वोट मिले जबकि सुनीता चौधरी को 83028 वोट मिले। बड़कागांव सीट से रोशन लाल चौधरी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी अंबा प्रसाद को 31393 वोट से करारी शिकस्त दी। उन्हें कुल 124468 वोट मिले, जबकि अंबा प्रसाद को 93075 वोट मिले। जीत के बाद ममता देवी और रोशन लाल चौधरी के समर्थकों ने शानदार जुलूस निकाला।

एक तरफ जहां कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता जश्न में डूबे थे। वहीं दूसरी तरफ भाजपाइयों को भी जश्न मनाने का पूरा मौका मिला। भाजपा ने कांग्रेस के उसके किले को फतह किया जो पिछले 15 वर्षों से कांग्रेस के कब्जे में थी। वहां एक ही परिवार के तीन लोग कांग्रेस के विधायक रह चुके थे। पिता योगेंद्र साहू, मां निर्मला देवी और बेटी अंबा के चंगुल में रही बड़कागांव की जनता को रौशन करने के लिए रोशन लाल चौधरी ने एक उम्मीद की नई किरण जगा दी है।

रामगढ़ विधानसभा सीट से ममता देवी की जीत का श्रेय कांग्रेस ने माता और बहनों को दिया है। कांग्रेसी नेताओं ने खुले जीप पर ममता देवी का स्वागत किया। इस दौरान महिलाएं भी सड़क पर उतरी। उन लोगों ने जमकर जश्न मनाया और एक दूसरे को अबीर लगाकर जीत की बधाई दी। यहां महिलाओं ने बैंड बाजे भी बजाए। जश्न में डूबी महिलाओं ने कहा कि कहा कि हेमंत सरकार ने उनका सम्मान किया है और वह उस सरकार की लाज बचा रही हैं।

बड़कागांव विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे भाजपा उम्मीदवार रोशन लाल चौधरी 20 वर्षों से क्षेत्र में संघर्ष कर रहे थे। वहीं उनके भाई चंद्रप्रकाश चौधरी और सुनीता चौधरी रामगढ़ सीट से जीतते आ रहे थे। इस बार का चुनाव नतीजा ऐसा रहा की ना तो चंद्र प्रकाश चौधरी की मेहनत रंग लाई और ना ही सुनीता चौधरी का काम लोगों को पसंद आया। रामगढ़ सीट हारने का गम रोशन लाल चौधरी के चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था। उन्होंने यह भी कहा कि बड़कागांव की जनता ने उन्हें नई जिम्मेदारी सौंपी है। वे जनता के उम्मीदों पर खरा उतरने का पूरा प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि जहां मैं खुद की जीत पर खुश हूं, वहीं उनकी पार्टी और परिवार के लोगों की हार पर गमजदा भी हैं। रोशन लाल चौधरी ने कहा कि हार और जीत जन सेवा की भावना को खत्म नहीं कर सकता। उनका पूरा परिवार क्षेत्र में जरूर रहेगा।

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