नयी दिल्ली:  कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष होंगे। पार्टी संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने लोकसभा के कार्यवाहक अध्यक्ष (प्रोटेम स्पीकर) भर्तृहरि महताब को पत्र भेज कर इस संबंध में कांग्रेस के फैसले के बारे में उन्हें अवगत कराया है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर ‘इंडिया’ गठबंधन के घटक दलों की नेताओं की बैठक के बाद कांग्रेस ने राहुल गांधी को नेता प्रतिपक्ष बनाने के बारे में घोषणा की। विपक्षी दलों की बैठक में लोकसभा अध्यक्ष पद के चुनाव की रणनीति पर चर्चा की गई।

नेता प्रतिपक्ष के पास कैबिनेट मंत्री का दर्जा होता है। हालांकि सिर्फ यही कारण नहीं है, जिसके कारण यह पद बेहद महत्‍वपूर्ण माना जाता है। दरअसल नेता प्रतिपक्ष विपक्ष की जिम्‍मेदारी निभाने के साथ ही कई संयुक्‍त संसदीय पैनलों और चयन समितियों का भी हिस्‍सा होता है।

इनमें सीबीआई के डायरेक्‍टर, सेंट्रल विजिलेंस कमिश्‍नर, भारत निर्वाचन आयोग के मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त और चुनाव आयुक्‍तों की नियुक्ति, मुख्‍य सूचना आयुक्‍त, लोकायुक्‍त और राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्‍यक्ष और सदस्‍यों को चुनने वाली समितियां शामिल है।

नेता प्रतिपक्ष के तौर पर राहुल गांधी का इन फैसलों में सीधी दखल होगी। इन कमेटियो के फैसलों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ही अब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की सहमति भी जरूरी होगी।

राहुल गांधी सीबीआई और ऐसी ही दूसरी एजेंसियों को लेकर सरकार को घेरते रहे हैं। ऐसे में अब इन एजेंसियों के शीर्ष पदों पर निय‍ुक्ति में उनकी भी अहम भागीदारी होने जा रही है।

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