
धनबाद। पेयजल स्वच्छता और उत्पाद मंत्री योगेंद्र प्रसाद बुधवार को धनबाद पहुंचे। होटल लेक्ससस में आयोजित स्वर्गीय विनोद बिहारी महतो की जयंती कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे मंत्री ने केंद्र सरकार पर झारखंड के साथ आर्थिक नाइंसाफी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि झारखंड का करीब 65 हजार करोड़ रुपये बकाया होने का मुद्दा राज्य सरकार लगातार केंद्र के सामने उठा रही है। वहीं एमएमडीआर कानून के प्रावधानों पर भी उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि राज्यों के अधिकारों का सम्मान होना चाहिए। मंत्री ने साफ कहा कि झारखंड के हितों के खिलाफ कोई कदम हुआ तो लोकतांत्रिक तरीके से सड़क से सदन तक विरोध किया जाएगा।
योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि उत्पाद विभाग लगातार काम कर रहा है और राजस्व बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। वहीं पेयजल विभाग को भी और गति देने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री सहित राज्य सरकार के प्रतिनिधि कई बार केंद्र से आग्रह करने दिल्ली गए हैं। कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री से मुलाकात और आश्वासन मिलने की बात भी मंत्री ने कही। एमएमडीआर कानून के प्रावधानों पर मंत्री ने कहा कि खान और खनिज से जुड़े प्रावधान राज्यों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय संविधान पीठ के राज्यों के अधिकारों से जुड़े फैसले का हवाला देते हुए कहा कि केंद्र को राज्यों के अधिकारों का सम्मान करना चाहिए।
मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार मंईयां सम्मान योजना, बिजली में राहत, पेंशन समेत कई जनकल्याणकारी योजनाएं चला रही है। ऐसे में राज्य के राजस्व पर असर पड़ने से इन योजनाओं पर भी प्रभाव पड़ सकता है। झारखंड सिर्फ खनिज संपदा वाला प्रदेश नहीं, बल्कि जंगल, पहाड़ और नदियों से समृद्ध राज्य है। अगर राज्य के खनिज संसाधनों का इस्तेमाल हो रहा है तो यहां के लोगों को सिर्फ प्रदूषित हवा और पानी नहीं मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि झारखंड के खनिज संसाधन अभिशाप नहीं, बल्कि विकास का माध्यम और वरदान होने चाहिए। जरूरत पड़ने पर सरकार सड़क से सदन तक अपनी बात रखेगी और व्यापक आंदोलन भी किया जा सकता है। पेयजल योजनाओं को लेकर मंत्री ने कहा कि हर घर तक नल से सुरक्षित पानी पहुंचाना सरकार का लक्ष्य है। कई योजनाओं में केंद्र और राज्य की साझेदारी है। राज्य सरकार अपनी हिस्सेदारी खर्च कर चुकी है, लेकिन केंद्र की राशि लंबित होने से कुछ योजनाओं की रफ्तार प्रभावित हो रही है।
उन्होंने कहा कि केंद्र से राशि नहीं मिलने की स्थिति में राज्य सरकार अपने स्तर पर वैकल्पिक व्यवस्था की संभावना पर भी विचार कर रही है। धनबाद में डीएमएफटी से जुड़े मामलों और नल-जल योजना में एजेंसियों की भूमिका को लेकर मंत्री ने कहा कि अगर किसी एजेंसी के स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं उत्पाद विभाग के राजस्व लक्ष्य पर मंत्री ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में करीब 04 हजार 10 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। इस वित्तीय वर्ष में इसे बढ़ाकर करीब 05 हजार करोड़ रुपये करने का लक्ष्य रखा गया है।
