आरा । बिहार के बहुचर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में आरा की अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए तत्कालीन एसडीएम और एसडीपीओ समेत 11 पुलिस अधिकारियों एवं कर्मियों के खिलाफ गैर जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए गिरफ्तारी के आदेश दिए हैं। भोजपुर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) की अदालत ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर 12 अगस्त तक न्यायालय में पेश करने का निर्देश दिया है। हालांकि, भोजपुर पुलिस ने इस कार्रवाई की जानकारी होने से इनकार किया है। अदालत की यह कार्रवाई शाहपुर थाना कांड संख्या 178/2026 से जुड़ी बताई जा रही है।

इस मामले में अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 73 के तहत गैर-जमानती वारंट जारी करने सहित जांच की प्रगति से संबंधित कई बिंदुओं पर अदालत से निर्देश देने की मांग की थी। जिन अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के खिलाफ वारंट जारी होने की बात कही जा रही है, उनमें जगदीशपुर के तत्कालीन एसडीएम संजीत कुमार, तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा, शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार, दारोगा अंकित आर्यन, हरिचंद्र कुमार, एएसआई रामाशंकर यादव, एसटीएफ के विकास कुमार, अक्षय कुमार और अन्य पुलिसकर्मी शामिल हैं। एसटीएफ जवान अक्षय कुमार को इस मामले में पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।

अधिवक्ता का दावा है कि भरत तिवारी के मोबाइल में कथित तौर पर महत्वपूर्ण साक्ष्य मौजूद थे और पुलिस द्वारा मोबाइल अपने कब्जे में लिए जाने के बाद उसके संबंध में भी जानकारी मांगी गई है। अधिवक्ता ने अदालत के समक्ष यह भी सवाल उठाया कि क्या किसी आरोपी ने जानबूझकर गिरफ्तारी से बचने का प्रयास किया है, क्या किसी को फरार घोषित किया गया है और मामले की जांच फिलहाल किस स्थिति में है। गैर-जमानती वारंट जारी करने की मांग के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के कई मामलों का हवाला दिए जाने की बात भी कही गई है।

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