
गयाजी। मोक्षधाम गया जी में पितृपक्ष 2026 के श्राद्ध कर्म का विधिवत आगाज हो गया। शनिवार की सुबह सूर्योदय के साथ ही हजारों की संख्या में श्रद्धालु फल्गु नदी के तट पर पहुंचे। देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने अपने पितरों को जलांजलि अर्पित की। तर्पण के बाद देवघाट पर सामूहिक रूप से पिंडदान का कर्मकांड किया गया। इसके साथ ही गया जी में 15 दिनों तक चलने वाले पितृपक्ष के प्रमुख कर्मकांड शुरू हो गए। पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना लेकर श्रद्धालु सुबह से ही फल्गु नदी के विभिन्न घाटों पर पहुंचने लगे थे। पारंपरिक वेशभूषा में अलग-अलग राज्यों से आए श्रद्धालुओं की भीड़ से विष्णुपद और आसपास का पूरा क्षेत्र भक्तिमय नजर आया। फल्गु तट पर तर्पण और पिंडदान के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार से वातावरण आध्यात्मिक हो उठा।
त्रिपाक्षिक गया श्राद्ध के पहले दिन शुक्रवार को पुनपुन और गोदावरी सरोवर में पिंडदान का कर्मकांड शुरू हुआ था। शनिवार से गया जी के प्रमुख पिंडवेदी स्थलों पर 15 दिनों तक पिंडदान और श्राद्ध कर्म का सिलसिला चलेगा। दूर-दराज से आए श्रद्धालु निर्धारित पिंडवेदी स्थलों पर पहुंचकर अपने पितरों के निमित्त कर्मकांड कर रहे हैं। गया जी में पिंडदान के लिए देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालुओं का पहुंचना जारी है। पितृपक्ष के दौरान श्रद्धालु फल्गु नदी में तर्पण करने के साथ ही विष्णुपद मंदिर में भगवान विष्णु के चरण का दर्शन भी कर रहे हैं। पितृपक्ष को लेकर विष्णुपद मंदिर क्षेत्र में श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ देखी जा रही है। भगवान विष्णु के चरण के दर्शन के लिए सुबह से ही श्रद्धालु कतार में खड़े नजर आए। विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति की ओर से श्रद्धालुओं को सुविधापूर्वक दर्शन कराने की व्यवस्था की गई है। पितृपक्ष के दौरान गया जी आने वाले श्रद्धालु फल्गु तट पर तर्पण और विभिन्न वेदियों पर पिंडदान के साथ विष्णुपद मंदिर में भगवान विष्णु के चरण का दर्शन करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार गया में पिंडदान को पितरों की मुक्ति और मोक्ष से जोड़ा जाता है।

