
रांची। सुरक्षा बलों ने एक करोड़ रुपये के इनामी शीर्ष माओवादी मिसिर बेसरा को गिरफ्तार किया। उसके साथ सक्रिय सदस्य मेहनत उर्फ मोच्छू और गौरव को भी दबोचा। मेहनत उर्फ मोछू रीजनल कमेटी सदस्य है। इसपर राज्य सरकार ने 15 लाख का इनाम घोषित कर रखा था। जानकारी के अनुसार, मंगलवार देर शाम कोबरा, सीआरपीएफ और झारखंड पुलिस की संयुक्त टीम ने सटीक खुफिया सूचना के आधार पर जाल बिछाकर यह कार्रवाई की। धनबाद-गिरिडीह बॉर्डर पर कार्रवाई में दो ग्रामीणों को भी गिरफ्तार किया। लंबे समय से फरार चल रहे मिसिर बेसरा पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था और वह सुरक्षा एजेंसियों की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल था। मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी को झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक माना जा रहा है। अब झारखंड में सिर्फ 17 माओवादी शेष हैं।
सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता: झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षाबलों को अब तक की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक मिली है। माओवादी संगठन के शीर्ष नेता एवं पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर उर्फ सुनिर्मल उर्फ सागर को गिरिडीह जिले से गिरफ्तार कर लिया गया।
उसके साथ माओवादी संगठन की रीजनल कमेटी का सदस्य मोछू उर्फ मेहनत उर्फ विभीषण उर्फ कुंबा मुर्मू तथा गौरव उर्फ सौरभ को भी गिरफ्तार किया गया है। मंगलवार देर शाम कोबरा, सीआरपीएफ और झारखंड पुलिस की संयुक्त टीम ने खुफिया सूचना के आधार पर यह कार्रवाई की।
मूल रूप से गिरिडीह जिले के पीरटांड़ थाना क्षेत्र स्थित मदनडीह गांव निवासी मिसिर बेसरा माओवादी संगठन की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली इकाई पोलित ब्यूरो का सदस्य था। उस पर विभिन्न राज्यों की ओर से 1 करोड़ का इनाम घोषित था। वह पिछले डेढ़ दशक से अधिक समय तक झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में माओवादी गतिविधियों का प्रमुख रणनीतिकार माना जाता रहा। सारंडा, पोड़ाहाट और कोल्हान के घने जंगलों में माओवादी नेटवर्क को मजबूत करने में मिसिर बेसरा की अहम भूमिका रही।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार वह संगठन के सैन्य अभियानों की रणनीति तैयार करने, हथियारबंद दस्तों के संचालन, नए कैडरों की भर्ती, लेवी वसूली और विभिन्न जोनों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी संभालता था। सुरक्षा बलों के खिलाफ कई बड़े हमलों की योजना बनाने तथा संगठन की गतिविधियों को संचालित करने में भी उसका नाम लंबे समय से सामने आता रहा है। गिरफ्तार मोछू उर्फ मेहनत उर्फ विभीषण उर्फ कुंबा मुर्मू धनबाद जिले के बरवाअड्डा थाना क्षेत्र के घोड़ाबांधा गांव का निवासी है। वह माओवादी संगठन की रीजनल कमेटी का सदस्य था और झारखंड सरकार ने उस पर 15 लाख का इनाम घोषित कर रखा था। वह लंबे समय से मिसिर बेसरा का करीबी सहयोगी माना जाता था और सारंडा-पोड़ाहाट क्षेत्र में संगठन के संचालन, लेवी वसूली, कैडर प्रबंधन और अभियान के समन्वय में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। गिरफ्तार तीसरा माओवादी गौरव उर्फ सौरभ भी संगठन का सक्रिय सदस्य बताया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां उससे भी संगठन के नेटवर्क और अन्य फरार माओवादियों के संबंध में पूछताछ कर रही हैं।
खुल सकते हैं कई राज : सुरक्षा एजेंसियों को उम्मीद है कि तीनों माओवादियों से पूछताछ में संगठन के हथियारों के ठिकाने, आईईडी नेटवर्क, लेवी तंत्र, शहरी संपर्क, वित्तीय स्रोत और फरार माओवादी नेताओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां मिलेंगी। इन सूचनाओं के आधार पर आने वाले दिनों में सारंडा, कोल्हान, गिरिडीह और सीमावर्ती इलाकों में नक्सल विरोधी अभियान और तेज किए जाने की संभावना है।
मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी को झारखंड में माओवादी संगठन के शीर्ष नेतृत्व पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि इससे संगठन की सैन्य और रणनीतिक क्षमता को गहरा झटका लगेगा तथा झारखंड में माओवाद के खात्मे की दिशा में अभियान को निर्णायक बढ़त मिलेगी।

