
लखनऊ। अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त (आईआईडीसी) मनोज कुमार सिंह ने रविवार को दुर्गा शंकर मिश्रा के स्थान पर उत्तर प्रदेश के नए मुख्य सचिव (सीएस) का पदभार ग्रहण किया। 1988 बैच के आईएएस अधिकारी सिंह ने शाम को निवर्तमान सीएस दुर्गा शंकर मिश्रा से कार्यभार ग्रहण किया। शुरूआत में यह अनुमान लगाया जा रहा था कि श्री मिश्रा को चौथी बार सेवा विस्तार मिलेगा और श्री सिंह आईआईडीसी का प्रभार संभालते रहेंगे। जब योगी आदित्यनाथ 2017 में मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने ऐसे नौकरशाहों की पहचान की जिनके पास न केवल अनुभव और दक्षता थी बल्कि ईमानदारी, दृढ़ता और मजबूत कार्य नीति भी थी। मनोज कुमार सिंह ‘टीम योगी’ के इन महत्वपूर्ण सदस्यों में से एक हैं, जिन्होंने कड़ी चयन प्रक्रिया के बाद अब यूपी के सीएस की भूमिका संभाली है।
रोहतास जिले के शिवसागर प्रखंड अंतर्गत मझुई गांव निवासी आइएएस अधिकारी मनोज कुमार सिंह को उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव बनाए जाने पर उनके पैतृक गांव मझुई में खुशी का माहौल है। ग्रामीण बताते हैं कि मनोज सिंह व उनकी पत्नी व आइएएस अधिकारी रश्मि सिंह के कारण इस गांव की पहचान देश भर में बनी है।
स्थानीय मुखिया सत्येन्द्र सिंह बताते हैं कि 1988 बैच के आइएएस अधिकारी मनोज कुमार सिंह की गिनती देश के कर्तव्यनिष्ठ व तेज तर्रार अधिकारियों में होती है। उनके पिता स्व. राधिका रमण सिंह रांची के प्रसिद्ध चिकित्सक थे। मनोज कुमार सिंह की प्रारंभिक शिक्षा रांची से हुई थी। उनके छोटे भाई अरविंद सिंह का परिवार रांची में रहता है, जिसके कारण वे यहां खेती कराने के साथ रांची में भी रहते हैं।
मनोज सिंह मूल रूप से नाद गांव के- ग्रामीण : ग्रामीण व बीजेपी के मीडिया प्रभारी पुलकित सिंह बताते हैं कि मनोज सिंह मूल रूप से नाद गांव के हैं। छावनी मंझुई में है, जिसके कारण घर मकान व खेती बाड़ी मंझुई में ही है। ग्रामीण ललिता यादव, गौतम सिंह सहित अन्य लोगों ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि मनोज सिंह मिट्टी के साथ साथ पूरे बिहार और उत्तर प्रदेश का नाम रौशन किए हैं। उनके मुख्य सचिव बनने पर हर घर में खुशी है।
वरिष्ठतम अधिकारियों में से एक के रूप में उन्होंने अपने व्यापक अनुभव, दक्षता, समर्पण और क्षमता के कारण नौकरशाही में एक शानदार प्रतिष्ठा अर्जित की है। यही वजह है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने पूरे कार्यकाल में सिंह पर लगातार भरोसा जताया है। श्री सिंह वर्तमान में कृषि उत्पादन आयुक्त (एपीसी) और राज्य के आईआईडीसी के रूप में दो महत्वपूर्ण पदों पर हैं। इन भूमिकाओं के अलावा, वह पंचायती राज और खाद्य प्रसंस्करण के अतिरिक्त मुख्य सचिव के साथ-साथ यूपीडीए, यूपीएसएचए और पीआईसीयूपी के अध्यक्ष के रूप में वरिष्ठ पदों पर भी काम कर रहे हैं, जो राज्य के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं।
कोविड काल के दौरान श्री सिंह टीम 11 और बाद में टीम 9 का हिस्सा थे, जहां उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में कोविड-19 के प्रसार को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ‘बैंकिंग आपके दरवाजे पर’ की अवधारणा को मूर्त रूप देने वाली योगी ‘बीसी सखी’ योजना अब पूरे देश में एक मॉडल के रूप में पहचानी जा रही है। श्री सिंह ने इस पहल की योजना और कार्यान्वयन दोनों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यह योजना महिलाओं की आत्मनिर्भरता और वित्तीय समावेशन के एक उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा प्राप्त कर रही है। श्री सिंह ने 2019 के कुंभ मेले को एक भव्य वैश्विक आयोजन बनाने के मुख्यमंत्री के विजन को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नोडल अधिकारी के रूप में उन्होंने कुंभ 2019 से जुड़ी हर तैयारी की निगरानी की। अब मुख्य सचिव के रूप में उनका व्यापक अनुभव महाकुंभ 2025 के सफल आयोजन में सहायक सिद्ध होगा।
पंचायती राज के अपर मुख्य सचिव के रूप में मनोज कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री योगी के मिशन को जमीनी स्तर पर सफलतापूर्वक लागू किया। यूपी के सभी 75 जिलों को खुले में शौच से मुक्त घोषित करने और राज्य में सबसे अधिक शौचालयों के निर्माण में उनके प्रयासों की अहम भूमिका रही। उन्होंने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के हर चरण का नेतृत्व किया। समिट से पहले वह ‘टीम यूपी’ के प्रमुख सदस्य थे, जिसने मुख्यमंत्री के संदेश को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न देशों की यात्रा की।
