नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 139वें एपिसोड में विज्ञान, अनुसंधान और अंगदान के महत्व पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने ब्रेन रिसर्च के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए आईआईटी मद्रास स्थित सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारतीय वैज्ञानिकों और युवा शोधकर्ताओं का काम भविष्य में मानव स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल सकता है।

प्रधानमंत्री ने बताया कि अक्टूबर की शुरुआत में चेन्नई दौरे के दौरान उन्होंने वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और युवा प्रतिभाओं से मुलाकात की थी। इसी दौरान उन्होंने आईआईटी मद्रास में सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि यह सेंटर मानव मस्तिष्क के अध्ययन के लिए अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है।

100 मानव मस्तिष्कों की होगी 3D मैपिंग

पीएम मोदी के अनुसार, सेंटर ने एक आधुनिक ब्रेन इमेजिंग प्लेटफॉर्म विकसित किया है, जिसके जरिए मानव मस्तिष्क की हाई-रिजॉल्यूशन डिजिटल 3D तस्वीरें तैयार की जा रही हैं। इस परियोजना का लक्ष्य 100 मानव मस्तिष्कों की 3D मैपिंग कर उनका विस्तृत अध्ययन करना है। इस काम में आईआईटी मद्रास के ‘परम शक्ति’ सुपर कंप्यूटर की मदद ली जा रही है।

उन्होंने बताया कि इस शोध परियोजना में उद्योग जगत, आईआईटी के पूर्व छात्रों और शिक्षाविदों का भी योगदान है। प्रधानमंत्री ने कहा कि विज्ञान ने काफी प्रगति की है, लेकिन मानव मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को समझना अब भी एक बड़ी चुनौती है।

अल्जाइमर और डिमेंशिया के शोध में मिलेगी मदद

प्रधानमंत्री ने कहा कि अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसी बीमारियों को बेहतर तरीके से समझने के लिए मस्तिष्क पर गहन शोध जरूरी है। मानव मस्तिष्क की संरचना और कार्यप्रणाली के बारे में अधिक जानकारी मिलने से भविष्य में स्वास्थ्य अनुसंधान के नए रास्ते खुल सकते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि परियोजना के तहत जुटाए गए 100 मानव मस्तिष्कों से संबंधित डेटा को भविष्य में ओपन-सोर्स के रूप में उपलब्ध कराने की योजना है। इससे भारत सहित दुनिया के विभिन्न देशों के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को अध्ययन में मदद मिल सकेगी।

अंगदान से अनुसंधान को भी मिलता है बढ़ावा

कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने अंगदान के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अंगदान से जरूरतमंद लोगों की जान बचाने के साथ-साथ वैज्ञानिक अनुसंधान को भी आगे बढ़ाने में मदद मिलती है।

इस संदर्भ में उन्होंने मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम की शिवानी का उदाहरण दिया। प्रधानमंत्री के मुताबिक, शिवानी सड़क हादसे का शिकार हो गई थीं। इस कठिन परिस्थिति में उनके परिवार ने अंगदान का निर्णय लिया।

पीएम मोदी ने कहा कि शिवानी के परिवार का यह फैसला मानवता और समाज के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देता है। उन्होंने बताया कि ऐसे निर्णय जरूरतमंद लोगों के जीवन में उम्मीद जगा सकते हैं और चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान को भी प्रोत्साहित कर सकते हैं।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में विज्ञान, तकनीक और अंगदान को मानव कल्याण से जोड़ते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं।

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