
नई दिल्ली। ट्रेड डील को लेकर चल रही असमंजसता को दूर करने के बाद भारत और अमेरिका के संबंधों में दिनों दिन नये भरोसे का संचार हो रहा है। इस क्रम में भारत ने शुक्रवार को अमेरिका के नेतृत्व वाले पैक्स सिलिका गठबंधन में औपचारिक रूप से शामिल होने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर कर दिया।
यह कदम आर्टिफिशिएल इंटेलीजेंस (एआई) और दुर्लभ खनिजों की सुरक्षित, मजबूत और विश्वसनीय सप्लाई चेन बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अभी तक दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति, शोधन व खनन में पूरी दुनिया चीन पर निर्भर है।
एआई इम्पैक्ट समिट में समझौते पर हस्ताक्षर : इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने किए जबकि अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और आर्थिक मामलों के लिए अमेरिकी अंडर सेक्रेटरी आॅफ स्टेट जैकब हेलबर्ग भी इस समारोह में मौजूद थे। अमेरिका के अवर सचिव जैकब हेलबर्ग ने भारत के सहयोग को 21वीं सदी की आर्थिक और तकनीकी व्यवस्था को परिभाषित करने वाला कदम बताया।
उन्होंने कहा कि पैक्स सिलिका इस विश्वास की घोषणा है कि भविष्य उन्हीं देशों का है जो निर्माण क्षमता विकसित करते हैं और लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर सहयोग को आगे बढ़ाते हैं। पैक्स सिलिका की पहल दिसंबर 2025 में वाशिंगटन में की गई थी।
इसकी पहली बैठक अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेट्री की अगुवाई में हुई थी जिसमें भारत का प्रतिनिधित्व कैबिनेट मंत्री वैष्णव ने किया था। उसके बाद हाल ही में इसकी एक और बैठक अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने बुलाई थी जिसमें विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हिस्सा लिया था।
यह गठबंधन महत्वपूर्ण खनिजों से लेकर सेमीकंडक्टर और एआइ इंफ्रास्ट्रक्चर तक पूरी सप्लाई चेन में गहन आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य पारस्परिक समृद्धि, सुरक्षा और एआइ आधारित विकास सुनिश्चित करना है।
क्या है पैक्स सिलिका?
ऐसे में पैक्स सिलिका अमेरिका अगुवाई में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शुरू किया गया एक नया अभियान है ताकि चीन के उपर निर्भरता ना रहे। इसमें आॅस्ट्रेलिया, ग्रीस, इजराइल, जापान, कतर, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात और यूनाइटेड किंगडम जैसे देश सदस्य हैं।
