
टोक्यो। जापान की संसद ने शाही परिवार के लगातार घटते आकार को देखते हुए शाही उत्तराधिकार से जुड़े नियमों में अहम बदलाव को मंजूरी दे दी है। हालांकि, महिलाओं के सम्राट बनने पर लगी रोक को यथावत रखा गया है।उच्च सदन से पारित नए कानून के तहत 15 वर्ष से अधिक आयु के दूर के पुरुष रिश्तेदारों को दोबारा शाही परिवार में शामिल किया जा सकेगा। इसके अलावा, शाही परिवार की महिलाएं अब किसी आम नागरिक से विवाह करने के बाद भी अपना शाही दर्जा बनाए रख सकेंगी।हालांकि, कानून में महिलाओं को सिंहासन पर बैठने की अनुमति नहीं दी गई है। ऐसे में वर्तमान सम्राट की एकमात्र संतान राजकुमारी आइको अब भी उत्तराधिकारी नहीं बन सकेंगी। यह विधेयक पहले ही निचले सदन से पारित हो चुका है और औपचारिक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद लागू हो जाएगा।करीब 2,600 वर्ष पुराने जापानी राजतंत्र में वर्तमान समय में उत्तराधिकार के लिए योग्य पुरुष सदस्यों की संख्या बेहद सीमित रह गई है। पहले उत्तराधिकारी सम्राट के छोटे भाई राजकुमार फुमिहितो हैं, जबकि दूसरे स्थान पर उनके 19 वर्षीय पुत्र राजकुमार हिसाहितो हैं। उनके बाद सम्राट के 90 वर्षीय चाचा ही उत्तराधिकार के योग्य पुरुष सदस्य बचे हैं।भविष्य में यदि राजकुमार हिसाहितो के परिवार में कोई पुरुष उत्तराधिकारी नहीं होता है, तो शाही उत्तराधिकार की परंपरा टूटने का खतरा पैदा हो सकता है। इसी चुनौती से निपटने के लिए द्वितीय विश्व युद्ध के बाद शाही परिवार से अलग किए गए 11 पूर्व शाही शाखाओं के पुरुष वंशजों को फिर से शाही परिवार में शामिल करने का प्रावधान किया गया है।गौरतलब है कि पहले शाही परिवार की महिलाओं को आम नागरिक से विवाह करने पर अपनी शाही उपाधि छोड़नी पड़ती थी। राजकुमारी माको ने 2021 में विवाह के बाद इसी नियम के तहत शाही परिवार छोड़ दिया था। वहीं, प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची समेत कई रूढ़िवादी नेता पुरुष उत्तराधिकार की परंपरा जारी रखने के पक्षधर हैं, जबकि हालिया जनमत सर्वेक्षणों में महिला सम्राट के समर्थन में व्यापक जनसमर्थन देखने को मिला है।
