
रामगढ़ । अपनी मां रूपी सोरेन को मुखाग्नि देते ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन फफक पड़े। उनका दर्द इतना बड़ा था कि उन्हें कोई भी ढांढस देने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। उनके पिता शिबू सोरेन को गुजरे हुए मात्र 14 महीने ही हुए थे। पिता के जाने का दर्द मुख्यमंत्री अभी भूल भी नहीं पाए थे, कि उनके सर से मां का साया उठ गया। माता और पिता किसी परिवार के रीढ होते हैं।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन राजनीतिक तौर पर तो बेहद मजबूत और दृढ़ निश्चय वाले जाने जाते हैं। लेकिन जब पारिवारिक संकट उनके समक्ष आया तो उनकी आंखें छलछला उठीं। वे खुद इस दर्द को किसी से बयां नहीं कर पा रहे थे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इर्द-गिर्द उनका बेटा नितिन सोरेन हमेशा मौजूद रहा। वह अपने पिता को ना सिर्फ संबल दे रहा था, बल्कि पारिवारिक जिम्मेदारियां को निभाने में भी अपना सहयोग दिखा रहा था।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके बेटे नितिन सोरेन जैसे ही शव वाहन से रूपी सोरेन का शव लेकर गांव पहुंचे, वहां मौजूद लोग भी उनके दर्द को बांटने पहुंच गए थे। सैकड़ो महिलाएं मुख्यमंत्री के घर पहुंचीं।
