
औरंगाबाद। कभी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले रफीगंज के पूर्व विधायक अशोक कुमार सिंह ने अब राष्ट्रीय जनता दल का दामन थाम लिया है। रविवार को गांधी मैदान में आयोजित मिलन समारोह में उन्होंने राजद की सदस्यता ग्रहण की। तेजस्वी यादव की मौजूदगी में राजद में शामिल होते ही समर्थकों ने अशोक सिंह जिंदाबाद के नारे लगाए। तेजस्वी के पहुंचने से कार्यक्रम में युवाओं और कार्यकर्ताओंमें खासा उत्साह दिखा। अशोक के राजद में जाने को वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव के बाद जदयू से उनकी बढ़ी दूरी के रूप में देखा जा रहा है। विधानसभा चुनाव में जदयू ने रफीगंज से उन्हें टिकट नहीं दिया था। पार्टी ने 2020 के चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में दूसरे स्थान पर रहे प्रमोद कुमार सिंह को मैदान में उतारा।
प्रमोद ने चुनाव जीतकर रफीगंज में जदयू का परचम कायम रखा। टिकट नहीं मिलने से नाराज अशोक ने चुनाव तो नहीं लड़ा, लेकिन पार्टी प्रत्याशी के विरोध में खुलकर खड़े हो गए थे। इसके बाद जदयू ने उन्हें दल से बाहर कर दिया था। रफीगंज प्रखंड के बलवंत बिगहा गांव निवासी अशोक कुमार सिंह को राजनीति विरासत में मिली है। उनके पिता रामाधार सिंह 1990 में गया जिले के गुरुआ विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक चुने गए थे। लालू प्रसाद के करीबी होने के कारण उन्हें निगरानी समिति का चेयरमैन बनाया गया था।
अशोक ने अपनी राजनीतिक पारी की शुरूआत 2005 के फरवरी विधानसभा चुनाव में लोजपा के टिकट से रफीगंज से की। नवंबर 2005 में हुए चुनाव में समाजवादी पार्टी के टिकट पर मैदान में उतरे, लेकिन करीब दो हजार मतों तक सिमट गए। 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान अशोक जदयू में शामिल हुए। वर्ष 2010 में पार्टी ने उन्हें रफीगंज से विधानसभा का टिकट दिया और उन्होंने जीत दर्ज कर पहली बार विधानसभा की दहलीज पार की। 2015 में भी जदयू के टिकट पर विधायक बने। हालांकि, 2020 का चुनाव उनके लिए निराशाजनक रहा। जदयू के प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने के बावजूद वह तीसरे स्थान पर रहे। राजद के मो. नेहालुद्दीन ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद पार्टी ने उन्हें औरंगाबाद जदयू का जिलाध्यक्ष बनाया।
