
दतिया । मध्य प्रदेश के दतिया में राज परिवार का उत्तराधिकारी कौन होगा। इसे लेकर विवाद शुरू हो गया है। राहुल देव सिंह ने खुद को दतिया का 14वां राजा बताते हुए रविवार को एक हेरिटेज होटल में राजतिलक किया। इस समारोह को दतिया राजघराने और स्थानीय ठाकुर समाज ने अवैध बताया है। समाज और राजपरिवार का कोई भी सदस्य इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुआ। राहुल देव सिंह को अब गोविंद सिंह जू देव के नाम से जाना जाएगा।
राहुल देव सिंह ने दतिया के एक हेरिटेज होटल में राजतिलक समारोह आयोजित किया। उन्होंने खुद को दतिया का राजा घोषित किया। इस समारोह में देशभर के कई राजा-महाराजा, सांसद, रेसलर और कंप्यूटर बाबा जैसे लोग शामिल हुए। अयोध्या और वाराणसी से आए ब्राह्मणों ने मंत्रोच्चार के साथ रस्में पूरी कीं। राहुल देव सिंह को पारंपरिक पोशाक पहनाई गई और पकड़ी पहनाकर राजा बनाया गया।
राहुल देव सिंह पहले दतिया के राजपरिवार की राजकुमारी परिणिता राजे को संगीत सिखाते थे। इसी दौरान दोनों में प्यार हो गया और उन्होंने शादी कर ली। इस तरह राहुल देव राजपरिवार के दामाद बन गए। राहुल देव सिंह पहले भी कई काम कर चुके हैं। वे राजनीति में भी अपनी किस्मत आजमा चुके हैं। उन्होंने महामंडलेश्वर की उपाधि भी ली है। यह भी बताया जाता है कि राहुल देव कभी राजपरिवार के लिए गाड़ी भी चलाते थे।
दतिया राजघराने और ठाकुर समाज इस आयोजन से नाराज हैं। उन्होंने इसे पूरी तरह से अवैध बताया है। समाज ने राहुल देव सिंह और उनके परिवार को समाज से बाहर कर दिया है। समाज ने दतिया के रढ वीरेंद्र मिश्रा को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की है।
दतिया राजवंश के वंशज घनश्याम सिंह ने इस राजतिलक पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जब परिवार में कई सदस्य मौजूद हैं, तो दामाद का क्यों तिलक किया जा रहा है। उनका कहना है कि राहुल देव सिंह स्व. पद्माकुमारी जी की वसीयत के आधार पर राजतिलक कर रहे हैं। लेकिन घनश्याम सिंह ने ऐसी किसी भी वसीयत के होने से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि यह संभव नहीं है।
