जगदलपुर | सुरक्षाबलों को नक्सल मोर्चे पर बड़ी सफलता मिली है। देश के सबसे चर्चित और खतरनाक नक्सली नेताओं में शामिल हिड़मा को सुरक्षाबलों ने मार गिराया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़–आंध्रप्रदेश बॉर्डर पर चली मुठभेड़ में छह नक्सली ढेर हुए हैं, जिनमें हिड़मा और उसकी पत्नी भी शामिल बताए जा रहे हैं। हिड़मा की एक तस्वीर भी सामने आई है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। मौके से नक्सलियों के शव और हथियार बरामद किए गए हैं। क्षेत्र में सर्चिंग जारी है।

16 की उम्र में उठाया था हथियार : मादवी हिडमा ने 16 साल की उम्र में हथियार उठाया था। इसके बाद वह पीछे मुड़कर नहीं देखा। छत्तीसगढ़ में हुए तमाम बड़ी नक्सली घटनाओं में वह शामिल रहा है। 43 की उम्र में सुरक्षाबलों ने हिडमा और उसकी पत्नी राजे के मारे जाने की खबर है। यह मुठभेड़ आंध्र प्रदेश के अल्लुरी सीताराम जिले के इलाके में जारी है। तेलंगाना पुलिस ने हिडमा के मारे जाने की पुष्टि की है। वह नक्सलियों का टॉप कमांडर था। कई बार सुरक्षाबलों ने उसे घेरा था लेकिन बच निकला।

26 घातक हमलों शामिल रहा है हिडमा : वहीं, कुख्यात माओवादी कमांडर मदवी हिडमा 26 घातक हमलों में शामिल रहा है। इसमें 76 सीआरपीएफ जवानों की हत्या से लेकर दरभा घाटी नरसंहार तक में उसके नाम शामिल हैं। लंबे समय से सुरक्षाबल उसकी तलाश कर रहे थे। आखिरकार उसे ढेर करने में जवानों को सफलता मिली है। छत्तीसगढ़ से भागकर वह आंध्र और तेलंगाना की जंगलों में शरण ले रहा था।

कौन है मदवी हिडमा :मदवी हिडमा का जन्म छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले स्थित पूवर्ति गांव में 1981 में हुआ था। वह अभी पीएलजीएम बटालियन नंबर -1 का प्रमुख था। यह माओवादियों का सबसे घातक हमलावर इकाई। साथ ही सीपीआई माओवादी की सेंट्रल कमिटी का सबसे युवा सदस्य था। वह बस्तर क्षेत्र से सेंट्रल कमिटी में शामिल होने वाला एकमात्र आदिवासी सदस्य था। छत्तीसगढ़ में सिर्फ उस पर 50 लाख रुपए का इनाम था। साथ ही उसने दो शादियां की थी। मुठभेड़ में उसकी दूसरी पत्नी राजे उर्फ राजक्का भी मारी गई। मदवी हिडमा का असली नाम संतोष था। यह मदवी हिडमा नाम उसे नक्सली संगठन में शामिल होने के बाद मिला था।

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