नई दिल्ली । ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुनिया ने भारत की सैन्य ताकत देखी। इस दौरान राफेल, सुखोई-30 एमकेआई जैसे फाइटर जेट और ब्रह्मोस मिसाइल की खूब चर्चा हुई। लेकिन, एक और देसी हथियार है जो बहुत मारक है। यह हथियार है एटीएजीएस तोप यानी एडवांस टोड आर्टिलरी गन सिस्टम। डीआरडीओ ने इसे बनाया है। यह तोप भारत की धरती से ही पाकिस्तान के लाहौर जैसे शहर में हमला कर सकती है। भारत सरकार ने 6900 करोड़ रुपये में 307 तोपों की खरीद का सौदा किया है।


देसी तोप एटीएजीएस को बोफोर्स तोप का बाप कहा जा रहा है। बोफोर्स तोप से भारत ने करगिल युद्ध जीता था। एटीएजीएस तोप को डीआरडीओ ने बनाया है। यह 155 मिमी/52 कैलिबर की तोप है। भारत की दो कंपनियां, भारत फोर्ज और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड, इसे बना रही हैं। इस तोप की सबसे बड़ी खासियत है कि यह दूर तक मार कर सकती है और निशाना भी सटीक लगाती है। यह ‘शूट एंड स्कूट’ यानी हमला करने के बाद तुरंत आगे बढ़ने वाली तोप है। यह तोप पंजाब के अमृतसर से पाकिस्तान के लाहौर शहर को भी तबाह कर सकती है। अमृतसर से लाहौर की दूरी सिर्फ 50 किमी है।

रेगिस्तानी हो या बर्फीली चोटियां, हर जगह काम करेगी
एटीएजीएस तोप राजस्थान के रेगिस्तान से लेकर सियाचिन की बर्फीली चोटियों तक में काम कर सकती है। डीआरडीओ इसकी रेंज को 80 से 90 किमी तक बढ़ाने पर काम कर रहा है। इसके लिए जीपीएस-गाइडेड और रैमजेट प्रोपेल्ड गोले बनाए जा रहे हैं। अगर ऐसा हो जाता है, तो इस तोप का निशाना और भी अचूक हो जाएगा। इसकी रेंज इतनी बढ़ जाएगी कि यह दुश्मन देश के अंदर तक हमला कर सकेगी।

90 किमी प्रति घंटे की रफ्तार
एटीएजीएस की एक और खासियत है कि इसे सिर्फ 80 सेकंड में तैनात किया जा सकता है। अगर कोई खतरा हो, तो यह 85 सेकंड में अपनी जगह बदल सकती है और अपना बचाव कर सकती है। इसका सिस्टम 8×8 हाई मोबिलिटी ट्रक पर लगा है। यह ट्रक 90 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकता है। यह तोप 2.5 मिनट में 10 हाई-एक्सप्लोसिव गोले या 60 सेकंड में पांच गोले दाग सकती है।

तोप में 85 फीसदी सामान भारत का लगा
इस एटीएजीएस तोप में 85 फीसदी सामान भारत में ही बना है। इस एक तोप की कीमत 15 करोड़ रुपये है, जबकि, विदेशी तोपों की कीमत 35 से 40 करोड़ रुपये होती है। डीआरडीओ ने इस तोप पर 2012 में काम शुरू किया था। अब यह तोप भारतीय सेना में शामिल होने के लिए तैयार है। भारत सरकार ने इसी साल मार्च में 6900 करोड़ रुपये में 307 तोपों की खरीद का सौदा किया। इस तोप की पहली रेजिमेंट (18 तोपें) फरवरी 2027 तक मिल जाएंगी।

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