
नई दिल्ली। मानसून सत्र अब समाप्त होने वाला है, लेकिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच न खींचतान खत्म हुई और न संसद का गतिरोध टूट सका। बीते लगभग बीस दिनों में कई बार ऐसे अवसर आए, जब विपक्ष की मांग पूरी करते हुए सरकार सदन के सुचारू संचालन की राह बनाती दिखी, लेकिन नए-नए मुद्दों की सूची लिए सरकार की घेराबंदी के लिए विपक्ष हर बार रास्ते में खड़ा दिखा। पेपर लीक पर चर्चा और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का मुद्दा हल होने के बाद खास तौर पर कांग्रेस सांसद हर दिन संसद के मकर द्वार पर ‘गृह मंत्री सदन में आओ, जवाब दो के नारे बुलंद कर सरकार के बैकफुट पर होने का नैरेटिव खड़ा करने के प्रयास में दिखी, लेकिन सोमवार को गृह मंत्री द्वारा सदन में हर बिंदु पर जवाब देने के सरकार के आश्वासन के बाद नैरेटिव ने भी मौसम की तरह करवट लेना शुरू कर दी।



मंगलवार को संसद का दृश्य बदला हुआ था। संसद के द्वार पर विपक्ष से अधिक तेवर में सत्ता पक्ष था। कांग्रेस के लिए नारों में चुनौती गूंज रही थी- राहुल गांधी डरो मत, भागो मत। हिम्मत है तो सदन में आओ और गृह मंत्री का जवाब सुनो। छात्रों के मुद्दे पर सरकार को घेरने में विपक्ष ने इस बार कोई कसर नहीं छोड़ी। कई मुद्दों का हल हो जाने के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्य सभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे इसी मांग पर अड़े थे कि गृह मंत्री छात्रों पर सख्त कार्रवाई के संबंध में सदन में आकर जवाब दें, जबकि समाजवादी पार्टी मुख्य रूप से राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मुद्दा उठा रही थी। अपनी-अपनी मांग को लेकर संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले हर दिन यह विपक्षी सांसद प्रदर्शन करते दिखाई दिए, लेकिन मंगलवार को नजारा बदल चुका था। एक तो सरकार की ओर से गृह मंत्री के जवाब का आश्वासन और दूसरा झारखंड में चल रहा छात्र आंदोलन। इन दो कारणों से सरकार के तेवर पूरी तरह बदल गए।
संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले राजग सांसदों ने लाइब्रेरी से लेकर मकर द्वार तक पैदल मार्च निकाला। झारखंड में आंदोलनरत छात्रों के मुद्दे पर राहुल गांधी से जवाब मांग रहे थे। नारों का पलटवार था- राहुल गांधी दोषी हैं या अक्षम हैं, क्योंकि वहां कांग्रेस सरकार में भागीदार है। इसके अलावा राजग सांसद नारे लगा रहे थे- राहुल गांधी डरो मत, भागो मत। हिम्मत है तो सदन में आओ और गृह मंत्री का जवाब सुनो। भाजपा सांसद एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि संविधान निर्माताओं ने भी नहीं सोचा होगा कि एक बिगड़ा दिल शहजादे की उद्दंडता और सनक संसद को बंधक बना लेगी। उन्होंने राहुल गांधी के आचरण को लोकतंत्र के चुनौती बताते हुए चुनौती दी कि यदि हिम्मत है तो नेता प्रतिपक्ष सदन से भागे नहीं, चर्चा में भाग लेकर गृह मंत्री का जवाब सुनें। वहीं, विपक्ष भी अपने तेवर नरम नहीं पड़ने देना चाहता। सत्ता पक्ष के नारों के बीच से कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा मुस्कुराते हुए गुजरीं। वहीं, मल्लिकार्जुन खरगे, जयराम रमेश, पवन खेड़ा समेत पार्टी के कई सांसदों ने दावा किया कि कांग्रेस की शुरूआत से ही तीन मांगें थीं- गृह मंत्री सदन में आकर जवाब दें कि छात्रों पर पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया?
दूसरी कि प्रधानमंत्री छात्रों पर हुई कार्रवाई को लेकर देश से माफी मांगें और तीसरी मांग राम मंदिर चढ़ावा चोरी मुद्दे पर प्रधानमंत्री के जवाब की थी। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष ने अपना गोलपोस्ट नहीं बदला, जबकि संसद के किसी भी सदन की बिजनेस लिस्ट में अमित शाह द्वारा जवाब दिया जाना अभी तक सूचीबद्ध नहीं हुआ।

