
रांची। जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते से तीन दिनों की पूछताछ के बाद सीआईडी ने सोमवार को उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया। सीआईडी ने तीन दिन पहले उन्हें रिमांड पर लिया था। पूछताछ के दौरान खियांग्ते ने टीडीपीएल की इंट्री की कहानी सीआईडी को बतायी है। हालांकि, उन्होंने अभी भी स्वयं को निर्दोष बताया और कहा कि कई चीजें उनकी जानकारी में नहीं थीं।
उन्होंने कहा कि टीडीपीएल कंपनी जेएसएससी में ब्लैकलिस्टेड नहीं थी. उसे डी-इंपैनल किया गया था. जहां तक जेपीएससी के सदस्यों तथा अभय तिवारी के आरोपों की बात है, तो यह सब बेबुनियाद है. जो भी विषय उनके समक्ष आया, उस संबंध में उन्होंने यथोचित निर्णय लिया।
इधर जेएसएससी कार्यालय में छापा : झारखंड में जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही सीआईडी की टीम ने सोमवार को झारखंड कर्मचारी चयन आयोग के कार्यालय में छापेमारी की। टीम आयोग के सचिव सुधीर गुप्ता से पूछताछ कीञ सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी वर्ष 2024 में आयोजित सीजीएल परीक्षा के माध्यम से चयनित सभी अभ्यर्थियों के दस्तावेजों और परीक्षा से संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि परीक्षा में किसी स्तर पर अनियमितता हुई थी या नहीं और यदि किसी अभ्यर्थी को अनुचित तरीके से लाभ मिला है तो उसकी पहचान की जा सके। दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। इस परीक्षा के माध्यम से दो हजार से अधिक पदों पर नियुक्तियां की गई हैं। इसी परीक्षा को रद्द करने और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच की मांग को लेकर छात्र रांची में आंदोलन कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियों के आरोप सामने आए हैं और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच जरूरी है। इस बीच, मामले की जांच में परीक्षा कराने वाली एजेंसी टीडीपीएल के पूर्व मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी के बयान को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तिवारी ने सीआईडी को दिए बयान में स्वीकार किया है कि परीक्षा से पहले सीजीएल के प्रश्न और उत्तर उपलब्ध कराए गए थे। इस परीक्षा में खुद अभय तिवारी भी सफल हुआ था।
अभय तिवारी के अनुसार, पहले टीडीपीएल को जेएसएससी की परीक्षाओं के संचालन का काम मिलता था
