
रांची। बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ जमीन का फर्जीवाड़ा और उससे जुड़े मनी लाउंड्रिंग मामले में लगभग तीन वर्ष बाद पीएमएलए के विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत ने सुनवाई को अहम मुकाम पर पहुंचा दिया। अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर 14 आरोपियों के खिलाफ पीएमएलए की धारा 3 सहपठित धारा 4 के तहत आरोप तय कर दिया। सभी आरोपियों को आरोप पढ़कर सुनाया गया, जिसे उन्होंने नकारते हुए मुकदमे का सामना करने की इच्छा जताई। वहीं हेमंत सोरेन, बिनोद कुमार सिंह और राज कुमार पाहन के खिलाफ आरोप गठन फिलहाल टाल दिया गया। बिनोद कुमार सिंह ने हाईकोर्ट में आपराधिक पुनरीक्षण याचिका के माध्यम से चुनौती दी है। राज कुमार पाहन ने विशेषज्ञ राय लेने के लिए समय मांगा, जबकि हेमंत सोरेन की ओर से नए अधिवक्ता ने वकालतनामा दाखिल कर आरोप गठन के लिए समय देने का आग्रह किया। अदालत ने तीनों को अगली तिथि 11 अगस्त को उपस्थित होकर आरोप ग्रहण करने का निर्देश दिया।



ईडी ने यह ईसीआईआर 26 फरवरी 2023 को दर्ज की थी। जांच में आरोप है कि संगठित गिरोह ने बरियातू-बड़गाईं क्षेत्र की गैर-हस्तांतरणीय भुईंहरी जमीन की अवैध खरीद-बिक्री कर अपराध से अर्जित धन को वैध दिखाने का प्रयास किया। ईडी का दावा है कि जब्त डायरियों, बैंक लेनदेन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों से आरोपियों की भूमिका के पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं।
अदालत ने पूर्व राजस्व उपनिरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद, तपस घोष, शेखर कुशवाहा, मोहम्मद सद्दाम हुसैन, आनंद तिर्की उर्फ अंतु तिर्की, अफसर अली, मो. इरशाद अख्तर, कुमार राजश्री, मनोज कुमार यादव, प्रिया रंजन सहाय, बिपिन सिंह, बिजेंद्र सिंह, संजीत कुमार और मो. इरशाद के विरुद्ध आरोप गठित किया।

