पटना। नामांकन के दो दिन पहले तक राजद प्रदेश अध्यक्ष के पद की दौड़ में दो चेहरे थे। शुक्रवार दोपहर तक उनमें से एक नाम पीछे छूट गया। वे पार्टी के संकट-मोचक माने जाने वाले पूर्व मंत्री आलोक मेहता हैं। उसके बाद यह लगभग तय हो गया कि प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद के स्थानपर अब मंगनी लाल मंडल ही होंगे। कारण यह कि प्रदेश अध्यक्ष का चयन अब तक निर्विरोध ही हुआ है। सुप्रीमो लालू प्रसाद की पसंद व अनुमति से मात्र एक नामांकन होता रहा है। इसकी संभावना प्रबल है कि शनिवार को एकमात्र मंडल का ही नामांकन हो। शुक्रवार तक किसी ने भी नामांकन-पत्र नहीं लिया था। राजद नामांकन-पत्र भी उसे ही देता है, जिसके लिए सुप्रीमो लालू प्रसाद का संकेत होता है। अब तेजस्वी की पसंद का मान भी लालू की इच्छा से कम नहीं। सूत्र बता रहे कि दोनों का मानना है कि परंपरागत समीकरण (मुसलमान-यादव) के साथ अति-पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) को साधे बिना सत्ता तक पहुंच सहज नहीं।

ईबीसी में धानुक जाति से आने वाले मंडल के साथ एक विशेषता मिथिला का निवासी होना भी है, जहां कभी राजद की स्थिति मजबूत हुआ करती थी। विधानसभा के पिछले चुनाव में महागठबंधन ने वहां मुंह की खाई थी। ऐसे में मिथिला पर विशेष फोकस है। इसी लक्ष्य के साथ राजद 18 जनवरी को मंडल को जदयू से अपने पाले में ले आया था। मिथिला में पचपनिया कहे जाने वाले वस्तुत: ईबीसी ही हैं।

उजियारपुर का प्रतिनिधित्व करने वाले आलोक मेहता कुशवाहा समाज से हैं। लोकसभा चुनाव से ही इस समाज को साधने का उपक्रम हो रहा। पार्टी संसदीय दल के नेता अभय कुशवाहा भी इसी समाज से हैं। राजद की सत्ता में वापसी होने पर मेहता सरकार के प्रमुख चेहरों में से एक होंंगे। अभी वे महागठबंधन समन्वय समिति के सदस्य हैं। भविष्य की संभावनाओंं के दृष्टिगत ही शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें रोका है।

मध्य अप्रैल में दिल्ली में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद और जगदानंद सिंह के बीच लगभग ढाई घंटे तक भेंट-वार्ता हुई थी। लालू का कुशल-क्षेम जानने के बहाने हुई उस मुलाकात के दौरान ही जगदानंद ने विश्राम की अनुमति ले ली थी। उसके बाद अंदरखाने ऐसे योग्य व्यक्ति की तलाश शुरू हुई, जो लालू की इच्छा और तेजस्वी की राजनीतिक संभावनाओं के बीच तालमेल बिठाकर संगठन को आगे बढ़ा सके। कई नामों पर चर्चा के बाद अब्दुल बारी सिद्दिकी को भरोसेमंद माना गया, लेकिन बढ़ती उम्र और पूर्व-निर्धारित दायित्वों का हवाला देकर उन्होंने मना कर दिया। सिद्दिकी अभी राष्ट्रीय इकाई मेंं प्रधान महासचिव हैं और आगे भी उनके इस पद पर बने रहने की संभावना है। अंतत: मंडल का नाम तय हुआ है।

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