न्यूयॉर्क/वाशिंगटन । अमेरिका ने जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के लिए जिम्मेदार पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटा संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (टीआरएफ) को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया है। अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को एक बयान जारी करके यह जानकारी दी। बयान में विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि यह कार्रवाई पहलगाम हमला मामले में न्याय संबंधी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख पर काम करने की अमेरिका की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। अमेरिका के इस कदम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए वाशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास ने कहा कि इससे पता चलता है कि भारत-अमेरिका आतंकवाद-रोधी सहयोग कितना मजबूत है।

लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी पर ऐक्शन : ‘इमिग्रेशन और राष्ट्रीयता अधिनियम की धारा 219 और कार्यकारी आदेश 13224 के तहत लश्कर-ए-तैयबा के टीआरएफ और अन्य संबंधित उपनामों FTO और SDGT के रूप में मान्यता दी गई है। विदेश विभाग ने लश्कर-ए-तैयबा के FTO पदनाम की समीक्षा की है और उसे बरकरार रखा है।’

बयान में टीआरएफ को लश्कर-ए-तैयबा का प्रॉक्सी बताया गया है, जिसने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए हमले की जिम्मेदारी ली थी यह 2008 में लश्कर-ए-तैयबा द्वारा किए गए मुंबई हमलों के बाद से भारत में नागरिकों पर किया गया सबसे घातक हमला था। टीआरएफ ने भारतीय सुरक्षा बलों पर कई हमलों की जिम्मेदारी भी ली है, जिनमें 2024 में हुआ हमला भी शामिल है।

पहलगाम हमले में हुआ था नरसंहार : पहलगाम हमले ने भारत को हिला दिया था। हमले के बाद जिंदा बचे लोगों ने बताया था कि लोगों को धर्म पूछकर गोली मारी गई थी। लोगों को गोली मारने से पहले उनसे कलमा पढ़ने को कहा गया था। मारे गए 26 पीड़ितों में अधिकांश हिंदू थे। टीआरएफ ने तत्काल ही इस हमले की जिम्मेदारी ली थी। पहलगाम हत्याकांड के जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, जिसके तहत नियंत्रण रेखा के पार और पाकिस्तानी क्षेत्र में आतंकी नेटवर्क पर लक्षित हमले किए गए। इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष शुरू हुआ, जो 10 मई को खत्म हुआ।

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