
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने फाइटर पायलट एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को फिर से वायु सेना का उप प्रमुख नियुक्त किया गया है। जाने-माने टेस्ट पायलट एक जुलाई को अपना नया पद संभालकर वायु सेना में सबसे अहम लीडरशिप पदों में से एक की जिम्मेदारी लेंगे। उनकी नियुक्ति ऐसे अहम समय पर हुई है, जब भारतीय वायु सेना अपने आधुनिकीकरण और क्षमता बढ़ाने के कार्यक्रमों को आगे बढ़ा रही है।एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने पहली बार 15 मई, 2023 को एयर मार्शल नर्मदेश्वर तिवारी के स्थान पर उप वायु सेना प्रमुख का पदभार संभाला था। एयर मार्शल एक योग्य फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर होने के साथ-साथ एक एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट भी हैं। उन्हें मिग-21, मिग-29 और मिराज-2000 जैसे विभिन्न प्रकार के विमानों को उड़ाने का अनुभव भी है। पिछले 23 सालों से आशुतोष दीक्षित वायुसेना का हिस्सा रहे हैं। अपने अब तक के कार्यकाल में दीक्षित ने 20 से अधिक प्रकार के विमानों पर 3300 घंटे की उड़ान भरी है। उन्होंने ऑपरेशन सफेद सागर और रक्षक में भाग लिया है।उन्होंने भविष्य की प्रौद्योगिकियों को अपनाने से संबंधित कई परियोजनाओं का नेतृत्व किया है और यह सुनिश्चित करने के लिए काम किया है कि भारतीय वायु सेना ‘आत्मनिर्भरता’ पर निरंतर ध्यान केंद्रित करते हुए आधुनिकीकरण हासिल करे। उप वायु सेना प्रमुख के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान एलसीए मार्क-1ए, मार्क-2 और एएमसीए सहित कई स्वदेशी विमान परियोजनाओं में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। मौजूदा समय में एकीकृत रक्षा स्टाफ के प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं।इससे पहले वे केंद्रीय वायु कमान के वायु अधिकारी कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में कार्यरत थे। उन्होंने 30 अप्रैल 2025 को केंद्रीय वायु कमान की कमान छोड़ दी। इसके बाद एक मई 2025 को उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल जॉनसन पी मैथ्यू के स्थान पर एकीकृत रक्षा स्टाफ के प्रमुख का पदभार ग्रहण किया, जो 30 अप्रैल 2025 को सेवानिवृत्त हुए। वे दक्षिण पश्चिमी वायु कमान के वरिष्ठ वायु सेना अधिकारी के रूप में कार्य कर चुके हैं। वह पुणे स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और डुंडीगल स्थित वायु सेना अकादमी के पूर्व छात्र हैं। वे बांग्लादेश स्थित रक्षा सेवा कमान एवं स्टाफ कॉलेज और नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय रक्षा कॉलेज के भी पूर्व छात्र हैं।




