
कोलकाता/नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा की तर्ज पर अब देश की संसद यानी लोकसभा में भी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर एक बड़े राजनीतिक तख्तापलट की तैयारी चल रही है। सियासी गलियारों में यह चर्चा बेहद तेज है कि बहुत जल्द लोकसभा का नियंत्रण भी असली तृणमूल के हाथों में जाने वाला है। टीएमसी की वरिष्ठ सांसद काकली घोष दस्तिदार लोकसभा में नया दल नेता बनाया जा सकता है।



इस बार चर्चा के केंद्र में लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तिदार के हालिया सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर राजनीतिक हलकों में नए सिरे से विवाद खड़ा हो गया है। राज्य की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से यह अटकलें तेज हैं कि जिस तरह तृणमूल कांग्रेस के विधायी दल में असंतोष के संकेत दिखाई दिए हैं, उसी तरह लोकसभा में भी पार्टी के भीतर मतभेद उभर सकते हैं। इसी पृष्ठभूमि में काकोली घोष दस्तिदार के बयान को पार्टी नेतृत्व के प्रति असहमति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
पोस्ट में काकोली घोष दस्तिदार ने परोक्ष रूप से कहा कि लोगों ने पूर्ववर्ती सरकार की नीतियों के खिलाफ मतदान कर अपना जनादेश दिया था, जिसे कई राजनीतिक हलकों में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि मतदाताओं का निर्णय नीतियों और शासन की विफलता के खिलाफ जनमत का परिणाम है। इससे पहले धर्मतला के वाई-चैनल पर आयोजित एक धरना कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बिना नाम लिए काकोली घोष दस्तिदार पर निशाना साधा था। उन्होंने आरोप लगाया था कि टिकट न मिलने से जुड़े असंतोष के कारण कुछ नेता सार्वजनिक रूप से असहमति जता रहे हैं। 7 और 8 जून का दिन तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय अस्तित्व और भविष्य के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाला है।

