
मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने लोन रिकवरी के दौरान होने वाली मनमानी, धमकी और उत्पीड़न पर लगाम लगाने के लिए सख्स गाइडलाइन जारी किए हैं। नए नियमों के तहत अब रिकवरी एजेंट न तो कर्जदार को बार-बार फोन या मैसेज कर परेशान कर सकेंगे और न ही रिश्तेदारों, दोस्तों या कोवर्कर्स पर दबाव बना सकेंगे। इतना ही नहीं, मोबाइल फोन लोन के मामलों में भी बैंक अब मनमाने तरीके से फोन लॉक नहीं कर सकेंगे। ऐसा करने पर हर घंटे 250 रुपये मुकावजा देना पड़ सकता है। ये सभी नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे। आरबीआई का कहना है कि नए नियमों का मकसद लोन रिकवरी (loan recovery ) की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और ग्राहक अनुकूल बनाना है, ताकि लोन लेने वाला व्यक्तिओं यानी कर्जदारो के अधिकारों की रक्षा हो सके।



सुबह 8 बजे से पहले और शाम 7 बजे के बाद नहीं कर सकेंगे कॉल : नए नियमों के मुताबिक रिकवरी एजेंट केवल सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे के बीच ही कर्जदार से संपर्क कर सकेंगे। बकाया लोन के लिए बार-बार कॉल, मैसेज या धमकी भरे फोन करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। आरबीआई ने साफ किया है कि रिकवरी एजेंट किसी भी हाल में कर्जदार को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा नहीं कर सकते। वे सोशल मीडिया पर उसकी जानकारी, फोटो, ऑडियो या वीडियो भी साझा नहीं कर सकेंगे।
रिश्तेदारों और दोस्तों को परेशान करने पर रोक : अक्सर शिकायतें मिलती थीं कि रिकवरी एजेंट लोन लेने वाला शख्स के परिवार, दोस्तों या ऑफिस के सहकर्मियों को फोन कर दबाव बनाते हैं। नए नियमों के बाद इस तरह की कार्रवाई पर पूरी तरह रोक रहेगी। लोन से जुड़ी बातचीत केवल कर्जदार या उसके गारंटर से ही की जा सकेगी।
पहली विजिट से पहले देनी होगी सूचना : अब बैंक को रिकवरी एजेंट की पहली विजिट से पहले ग्राहक को इसकी जानकारी देनी होगी। यदि बैंक रिकवरी एजेंसी बदलता है, तो इसकी सूचना भी तुरंत देनी होगी। साथ ही, हर रिकवरी एजेंट के पास बैंक का अधिकृत पत्र और पहचान पत्र (आईडी कार्ड) होना अनिवार्य होगा।
मेडिकल इमरजेंसी, शादी या शोक के समय नहीं होगी वसूली : आरबीआई ने मानवीय पहलू को ध्यान में रखते हुए निर्देश दिया है कि मेडिकल इमरजेंसी, परिवार में मृत्यु या शादी जैसे संवेदनशील अवसरों पर रिकवरी एजेंट घर जाकर वसूली की कार्रवाई नहीं करेंगे। इसके अलावा, बैंक ऐसे इंसेंटिव या कमीशन भी नहीं दे सकेंगे, जिससे रिकवरी एजेंट ग्राहकों के साथ सख्ती या गलत व्यवहार करने के लिए प्रोत्साहित हों।
गलत रिकवरी पर बैंक को देना होगा मुआवजा : यदि किसी गलत या गैरकानूनी रिकवरी कार्रवाई से ग्राहक को नुकसान होता है, तो उसकी भरपाई की जिम्मेदारी बैंक की होगी। सभी बैंकों को रिकवरी से जुड़ी शिकायतों के लिए अलग शिकायत निवारण तंत्र (Grievance Mechanism) भी बनाना होगा। साथ ही, लोन रिकवरी से जुड़ी सभी कॉल की रिकॉर्डिंग कम से कम 6 महीने तक सुरक्षित रखनी होगी। केवल IIBF से प्रमाणित और प्रशिक्षित रिकवरी एजेंट ही वसूली का काम कर सकेंगे।
मोबाइल फोन लोन पर भी बदले नियम
आरबीआई ने फाइनेंस पर खरीदे गए मोबाइल फोन के लिए भी नए नियम तय किए हैं।
बैंक केवल उसी मोबाइल को लॉक कर सकेंगे, जिसका लोन बकाया हो।
किसी दूसरे लोन की वसूली के लिए मोबाइल लॉक नहीं किया जा सकेगा।
30 दिन की देरी के बाद ही सीमित प्रतिबंध लगाए जा सकेंगे।
60 दिन की देरी के बाद ही पूरी तरह लॉक करने की अनुमति होगी।
कॉल, SMS और SOS सेवा बंद नहीं होगी : मोबाइल लॉक होने की स्थिति में भी बैंक इनकमिंग कॉल, एसएमएस और इमरजेंसी SOS जैसी जरूरी सेवाएं बंद नहीं कर सकेंगे। साथ ही, ऐसी पाबंदियां भी नहीं लगाई जा सकेंगी, जिनसे ग्राहक का कामकाज प्रभावित हो।
मोबाइल अनलॉक में देरी पर हर घंटे का 250 रुपये देना होगा मुआवजा : यदि ग्राहक बकाया राशि चुका देता है, तो बैंक को एक घंटे के भीतर मोबाइल की सभी सुविधाएं बहाल करनी होंगी। इसमें देरी होने पर बैंक को 250 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से मुआवजा देना होगा। इसके अलावा बैंक या रिकवरी एजेंसी ग्राहक के मोबाइल में मौजूद कॉन्टैक्ट्स, फोटो, मैसेज, कॉल लॉग या लोकेशन डेटा तक पहुंच नहीं बना सकेगी। लोन पूरी तरह चुकाने के बाद मोबाइल लॉक करने वाली तकनीक भी हटानी होगी।

