
रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षाओं में मेरिट को दरकिनार कर पदों की रेवड़ी बांटने का एक और बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जांच एजेंसियों के हाथ एक ऐसा पुख्ता दस्तावेज लगा है, जिसने आयोग की कार्यप्रणाली की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। तत्कालीन जेपीएससी अध्यक्ष एल. खियांगते के लैपटॉप बैग से 15 अभ्यर्थियों की एक बेहद गोपनीय सूची बरामद हुई है। इस सूची में अभ्यर्थियों के नाम, रोल नंबर, रजिस्ट्रेशन नंबर और इंटरव्यू की तारीख के साथ हाथ से यह भी दर्ज था कि किसे कौन सा पद (डीएसपी, जेएएस और जेएफएस या नो) दिया जाना है।
दस्तावेजों की छानबीन और मिलान के बाद यह बात सामने आई है कि इस संदिग्ध ‘सेटिंग चार्ट’ में शामिल 15 में से 10 अभ्यर्थियों का 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में अंतिम रूप से चयन हो चुका है। इस खुलासे के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
जांच में पुष्टि हुई है कि पूर्व अध्यक्ष के पास मौजूद लिस्ट में शामिल जिन 10 अभ्यर्थियों को अंतिम परिणाम में सफलता मिली, उनमें प्रमुख नाम कश्मीरा हेम्ब्रम, रवि कुमार, महिमा सिंह, विवेक कुमार, जयदीप चौधरी, जनक राज, शालिनी राठी, सेजल सहरावत, विक्की, सरिता बारला हैं।
प्रारंभिक परीक्षा के सीसीटीवी फुटेज ने खोली पोल : अनुसंधानकतार्ओं ने जब इस सूची में शामिल कुछ प्रमुख अभ्यर्थियों रवि कुमार, कश्मीरा हेम्ब्रम, सेजल सहरावत, शालिनी राठी और विवेक कुमार के प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) केंद्र के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, तो कई गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं। फुटेज में यह स्पष्ट देखा गया कि ये अभ्यर्थी परीक्षा केंद्र पर परीक्षा देने के बजाय अधिकांश समय संदिग्ध गतिविधियों के घेरे में थे। इसके बावजूद पीटी और मेंस पास कर इनका अंतिम रूप से चयनित हो जाना साबित करता है कि इन्हें अनुचित साधनों के जरिए आगे बढ़ाया गया।
इंटरव्यू बोर्ड और सेटिंग का सीधा कनेक्शन : सीआईडी अनुसंधान में यह तथ्य भी पुख्ता हुआ है कि सूची में शामिल सभी अभ्यर्थियों ने सीधे तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांगते के साथ सांठगांठ की थी। सुनियोजित तरीके से इन सभी का साक्षात्कार अलग-अलग तिथियों पर किसी अन्य सदस्य के बजाय सीधे तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांगते के विशेष बोर्ड में ही कराया गया था। अध्यक्ष के निजी लैपटॉप बैग से इस सूची का मिलना और उसमें हाथ से लिखे पदों का हूबहू नतीजों में बदल जाना यह साबित करने के लिए काफी है कि इंटरव्यू केवल एक औपचारिकता था, जबकि परिणाम पहले ही तय किए जा चुके थे। फिलहाल एजेंसी इस पूरे सिंडिकेट और इसमें शामिल अन्य कड़ियों की गहन पड़ताल कर रही है।

