
न्यूयॉर्क। अमेरिका में मंगलवार को होने वाले मध्यावधि चुनाव (मिडटर्म इलेक्शन) को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के लिए बड़ी जनमत परीक्षा माना जा रहा है। करीब 21 महीने के शासन के बाद अमेरिकी मतदाता टैरिफ नीति, ईरान संघर्ष, महंगाई और आर्थिक चुनौतियों को लेकर अपना फैसला सुनाएंगे। चुनाव से पहले आए विभिन्न सर्वेक्षणों में डेमोक्रेटिक पार्टी को प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में बढ़त मिलने का अनुमान जताया गया है, जबकि सीनेट में मुकाबला बेहद दिलचस्प बना हुआ है।



चुनाव प्रचार के अंतिम दिन सोमवार को राष्ट्रपति ट्रंप के तेवर में भी संभावित हार की आशंका साफ नजर आई। उन्होंने स्वीकार किया कि मध्यावधि चुनाव में उनकी पार्टी का प्रदर्शन खराब रह सकता है। अपनी अंतिम चुनावी रैली में ट्रंप ने कहा कि आमतौर पर सत्तारूढ़ राष्ट्रपति की पार्टी मध्यावधि चुनाव में जीत हासिल नहीं कर पाती। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी ने चुनाव जीतने के लिए पूरी ताकत लगा दी है।
ट्रंप ने पिछले 32 दिनों में 20 राज्यों का दौरा कर 30 चुनावी रैलियां कीं। वाशिंगटन में अपनी अंतिम सभा के दौरान उन्होंने डेमोक्रेटिक नेताओं पर तीखे हमले किए और उन्हें कम्युनिस्ट, जिहादी तथा मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़ा बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि डेमोक्रेट्स उनकी सरकार की उपलब्धियों को बर्बाद कर देंगे। हालांकि, उनके भाषण में महंगाई और आम लोगों की आर्थिक परेशानियों जैसे अहम मुद्दों को अपेक्षाकृत कम जगह मिली।
सर्वेक्षणों में ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट
चुनाव से पहले आए सर्वेक्षण राष्ट्रपति ट्रंप के लिए चिंता बढ़ाने वाले हैं। रियल क्लियर पॉलिटिक्स (आरसीपी) के औसत सर्वेक्षण के मुताबिक, 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में 49.8 प्रतिशत वोट हासिल करने वाले ट्रंप की पार्टी को अब कांग्रेस चुनाव में डेमोक्रेट्स से कड़ी चुनौती मिल रही है। कांग्रेस चुनाव के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी को 52.1 प्रतिशत समर्थन मिलने का अनुमान है।
वहीं, ट्रंप की जॉब अप्रूवल रेटिंग भी लगातार नीचे आई है। उनके दूसरे कार्यकाल के पहले सप्ताह में यह 50.3 प्रतिशत थी, जो अब घटकर 39.1 प्रतिशत रह गई है। दूसरी ओर, उनके कामकाज से असंतुष्ट लोगों का आंकड़ा बढ़कर 58.8 प्रतिशत हो गया है।
महंगाई और ईरान संघर्ष बना चुनावी मुद्दा
मध्यावधि चुनाव में ट्रंप के सामने सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक मोर्चे पर है। हालांकि हालिया तिमाही में अमेरिकी अर्थव्यवस्था 3.4 प्रतिशत की दर से बढ़ी है, लेकिन सितंबर में महंगाई दर 3.7 प्रतिशत दर्ज की गई। खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की परेशानी बढ़ाई है।
विश्लेषकों के मुताबिक, आयात पर लगाए गए ट्रंप प्रशासन के टैरिफ और होर्मुज क्षेत्र में तनाव के कारण पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आई तेजी ने महंगाई को और बढ़ाया है। यही वजह है कि मतदाता सरकार की आर्थिक नीतियों और विदेश नीति के प्रदर्शन को भी चुनाव में कसौटी पर रख रहे हैं।
प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट्स की बढ़त का अनुमान
अमेरिका में करीब 17.4 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं में से लगभग 5.7 करोड़ लोग सोमवार शाम तक डाक मतदान और अर्ली वोटिंग के जरिए अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर चुके थे। एनबीसी न्यूज की ट्रैकिंग के अनुसार, पार्टी के आधार पर पंजीकृत शुरुआती मतदाताओं में 46 प्रतिशत डेमोक्रेट और 39 प्रतिशत रिपब्लिकन हैं।
आरसीपी, सीबीएस न्यूज और कुक पॉलिटिकल रिपोर्ट के सर्वेक्षणों में 435 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक पार्टी को बहुमत मिलने का अनुमान जताया गया है। इन अनुमानों के मुताबिक, डेमोक्रेट्स को 222 से 229 सीटें मिल सकती हैं। यदि ऐसा होता है तो प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण समाप्त हो सकता है।
सीनेट पर टिकी ट्रंप की उम्मीदें
अब ट्रंप की नजर सीनेट के नतीजों पर टिकी है। 100 सदस्यीय सीनेट में फिलहाल डेमोक्रेट्स के पास 47 सीटें हैं। बहुमत हासिल करने के लिए पार्टी को कई महत्वपूर्ण राज्यों में जीत दर्ज करनी होगी। हालांकि, सर्वेक्षणों में मुकाबला कड़ा बताया जा रहा है।
द न्यूयॉर्क टाइम्स के हालिया सर्वेक्षण के अनुसार, बहुमत तय करने वाले सात प्रमुख मुकाबलों में से छह में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार आगे चल रहे हैं। इससे रिपब्लिकन पार्टी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
मिशिगन में डेमोक्रेटिक नेता ने बदला पाला
चुनाव से ठीक पहले मिशिगन में डेमोक्रेटिक पार्टी को बड़ा झटका लगा है। पार्टी की नेता हेली स्टीवंस ने रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स को समर्थन देने की घोषणा कर दी है। स्टीवंस डेमोक्रेटिक सीनेट प्राइमरी में अब्दुल अल-सैयद से मामूली अंतर से हार गई थीं।
इस फैसले ने पार्टी के भीतर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि चर्च में आयोजित सुलह बैठक में शामिल होने से रोके जाने और चुनाव प्रचार के दौरान इजरायल को लेकर विवादित विज्ञापन चलाए जाने से वह नाराज थीं।
अलास्का और मेन में भी कांटे की टक्कर
अलास्का में डेमोक्रेटिक पार्टी पर आरोप लगा है कि उसने मतदाताओं को भ्रमित करने के लिए रिपब्लिकन उम्मीदवार डैन स्टीवंस से मिलते-जुलते नाम वाले एक निर्दलीय उम्मीदवार को मैदान में उतारा है। इस मामले में ट्रंप प्रशासन की ओर से दायर मुकदमे को अदालत ने खारिज कर दिया है। हालांकि, चुनाव परिणाम के बाद कानूनी लड़ाई आगे बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
वहीं, मेन राज्य में डेमोक्रेटिक पार्टी को उम्मीदवार बदलने की मजबूरी का सामना करना पड़ा। यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद पार्टी के मूल उम्मीदवार ने अपना नाम वापस ले लिया था। इसके बाद पार्टी ने उदारवादी रिपब्लिकन सीनेटर सुसान कोलिन्स के खिलाफ नया उम्मीदवार उतारा। कोलिन्स करीब 30 वर्षों से सीनेट में हैं और छठे कार्यकाल के लिए चुनाव लड़ रही हैं।
गौरतलब है कि अलास्का और मेन में रैंक-चॉइस वोटिंग प्रणाली लागू है। इसमें मतदाता अपनी पहली पसंद के साथ दूसरे विकल्प के उम्मीदवार को भी चुन सकते हैं। यदि पहले दौर में किसी उम्मीदवार को 50 प्रतिशत से अधिक वोट नहीं मिलते हैं, तो मतदाताओं की दूसरी पसंद के आधार पर नतीजे तय किए जाते हैं।
कुल मिलाकर, अमेरिका का यह मध्यावधि चुनाव केवल कांग्रेस में बहुमत का फैसला नहीं करेगा, बल्कि डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता, उनकी आर्थिक नीतियों और दूसरे कार्यकाल के प्रति जनता के भरोसे की भी बड़ी परीक्षा साबित होगा।

