
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को आयोजित होने वाली ‘इंडिया’ (INDIA) ब्लॉक की ‘दिल्ली चलो’ महारैली के खिलाफ दिल्ली के व्यापारी लामबंद हो गए हैं। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के नेतृत्व में व्यापारियों ने शनिवार को कमला बाजार सहित आसपास के व्यापारिक क्षेत्रों में दुकानों के बाहर पोस्टर लगाकर विरोध जताया और त्योहारी सीजन में भारी वित्तीय नुकसान की आशंका जताई। दुकानों के बाहर लगाए गए पोस्टरों पर लिखा था—”राजनीति के बाजार में मोहब्बत की दुकान बंद मत कीजिए।” व्यापारियों का सीधा अनुरोध लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और विपक्षी दलों के नेताओं से है कि वे रैली का स्थान बदलकर कारोबारियों के हितों की रक्षा करें।



10,000 करोड़ रुपए से अधिक के कारोबार पर संकट
सीटीआई के अध्यक्ष बृजेश गोयल ने बताया कि धनतेरस और दीपावली के त्योहारी सीजन के दौरान रैली का आयोजन व्यापारियों के लिए गंभीर आर्थिक संकट खड़ा कर देगा। धनतेरस में महज चार दिन शेष हैं। ऐसे महत्वपूर्ण समय में चांदनी चौक, कमला बाजार, सदर बाजार और करोल बाग जैसे ऐतिहासिक व प्रमुख बाजारों में माल की आवक और बिक्री चरम पर होती है। रैली में 10 लाख लोगों और भारी संख्या में वाहनों के आने की संभावना जताई जा रही है। सुरक्षा कारणों से यदि पुलिस ने रास्ते बंद किए या दुकानें बंद करवाईं, तो सान होगा।
लोडिंग-अनलोडिंग ठप होने का डर: माल परिवहन और लोडिंग-अनलोडिंग पूरी तरह बाधित होने से शहरभर के खुदरा और थोक बाजारों में जरूरी सामान की आपूर्ति प्रभावित होगी। बृजेश गोयल ने कहा कि व्यापारियों का किसी राजनीतिक दल से कोई विरोध नहीं है और लोकतंत्र में सभी को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन विरोध के समय और स्थान का चयन जनहित व व्यापार के प्रतिकूल है । तीन बार लिखा पत्र: उन्होंने कहा कि रैली का स्थान बदलने को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी को तीन बार पत्र भेजा गया, लेकिन कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली।
गठबंधन के नेताओं को भेजा संदेश: शनिवार को सीटीआई ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी, राजद नेता तेजस्वी यादव और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे सहित ‘इंडिया’ गठबंधन के सभी घटक दलों के शीर्ष नेताओं को पत्र भेजकर 1 नवंबर की रैली के स्थान पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है।
व्यापारियों ने पुरजोर अपील की है कि राजनीति के नाम पर ऐतिहासिक बाजारों के व्यापार को प्रभावित होने से बचाया जाए।

