
नई दिल्ली। नवंबर महीने की शुरुआत के साथ ही आम जनता, व्यापारियों और वाहन चालकों की जेब व दिनचर्या से जुड़े कई महत्वपूर्ण नियमों में बदलाव लागू हो गए हैं। जहां तेल विपणन कंपनियों ने त्योहारों से पहले 19 किलोग्राम वाले कॉमर्शियल गैस सिलेंडर के दामों में ₹17 तक की बढ़ोतरी कर दी है, वहीं दूरसंचार विभाग ने अनचाही कॉलों और फर्जीवाड़े पर लगाम लगाने के लिए मोबाइल पर कॉलर का पंजीकृत नाम प्रदर्शित करने की व्यवस्था शुरू की है। इसके अलावा ट्रांसपोर्ट और टैक्स व्यवस्था में भी बड़े संशोधन किए गए हैं।



1कॉमर्शियल गैस सिलेंडर के दामों में इजाफा, घरेलू सिलेंडर स्थिर
दामों में संशोधन: सरकारी तेल कंपनियों ने 19 किलोग्राम वाले कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में ₹17 तक की बढ़ोतरी की है। इस बढ़ोतरी से होटल, ढाबा और रेस्टोरेंट संचालकों की परिचालन लागत बढ़ेगी, जिसका असर बाहर खान-पान, नाश्ता और वैवाहिक आयोजनों की कैटरिंग सेवाओं पर मामूली वृद्धि के रूप में दिख सकता है। आम उपभोक्ताओं के लिए 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है और दरें पूर्ववत रहेंगी।
- फोन पर अनजान कॉलर का असली नाम दिखेगा (CNAP व्यवस्था)
नया नियम: दूरसंचार विभाग (DoT) के निर्देशों के तहत 4G और 5G नेटवर्क पर कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन (CNAP) की शुरुआत हो गई है। अब किसी भी अनजान नंबर से कॉल आने पर स्क्रीन पर नंबर के साथ संबंधित उपभोक्ता का आधिकारिक पंजीकृत नाम प्रदर्शित होगा।
थर्ड पार्टी ऐप से मुक्ति: इसके लिए उपयोगकर्ताओं को ट्रूकॉलर जैसे किसी बाहरी ऐप को इंस्टॉल करने की आवश्यकता नहीं होगी; यह सेवा दूरसंचार सेवा प्रदाताओं द्वारा सीधे नेटवर्क स्तर पर उपलब्ध कराई जा रही है।
असर: सिम लेते समय जमा किए गए आधिकारिक पहचान दस्तावेजों के आधार पर नाम प्रदर्शित होने से डिजिटल अरेस्ट, वित्तीय धोखाधड़ी और अनचाही स्पैम कॉलों से बचाव में मदद मिलेगी। - स्थानीय वाहन चालकों के लिए फास्टैग (FASTag) का वार्षिक पास
20 किमी दायरे में सुविधा: राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्थित टोल प्लाजा के 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले गैर-व्यावसायिक निजी वाहन मालिकों के लिए रियायती स्थानीय पास की सुविधा को सुगम बनाया गया है।
सालाना वैधता: निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले स्थानीय निवासी अब फास्टैग के जरिए वार्षिक स्थानीय पास का लाभ उठा सकेंगे, जिससे उन्हें बार-बार टोल भुगतान और कतारों से राहत मिलेगी। - जीएसटी (GST) रिफंड और रिटर्न में सरलीकरण
ऑटोमैटिक अप्रूवल: छोटे कारोबारियों और निर्यातकों के नकदी प्रवाह को बेहतर करने के लिए तय श्रेणियों में जीएसटी रिफंड को स्वचालित स्वीकृति (ऑटोमैटिक अप्रूवल) प्रणाली से जोड़ा गया है।
दस्तावेजी प्रक्रिया में कमी: ₹5 करोड़ से कम सालाना टर्नओवर वाले सूक्ष्म व लघु कारोबारियों के लिए रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रियाओं को और अधिक सरल बनाया गया है। - डिजिटल लेन-देन को प्रोत्साहन
व्यापारिक भुगतानों में पारदर्शिता: कुछ विशिष्ट रिटेल एवं थोक क्षेत्रों में बड़े नकद लेन-देन को हतोत्साहित करते हुए डिजिटल भुगतान और यूपीआई (UPI) आधारित लेन-देन को अनिवार्य व सुगम बनाने के दिशा-निर्देश प्रभावी किए गए हैं।

