
पटना। बिहार सरकार राज्य के पारंपरिक और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल करने जा रही है। सरकार ने चंपारण मटन और बकरी के दूध की ब्रांडिंग पर विशेष जोर देते हुए दोनों उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग दिलाने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है। सरकार का मानना है कि इससे स्थानीय पशुपालकों की आय बढ़ेगी, उत्पादों को बेहतर बाजार मिलेगा और बिहार की विशिष्ट पहचान मजबूत होगी।



मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की घोषणा के बाद राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के सहयोग से इस दिशा में रणनीति तैयार की जा रही है। ग्रामीण विकास एवं सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री श्रवण कुमार की पहल पर पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग चंपारण मटन की गुणवत्ता, स्वाद और स्थानीय नस्लों की विशेषताओं का वैज्ञानिक अध्ययन कराएगा। अध्ययन में मानक पूरे होने पर जीआई टैग के लिए प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।
वहीं, बकरी के दूध की पौष्टिकता और औषधीय गुणों को ध्यान में रखते हुए उसकी अलग ब्रांडिंग विकसित की जाएगी। सरकार की योजना है कि सुधा के बूथों पर बकरी का दूध और उससे बने अन्य उत्पाद भी उपलब्ध कराए जाएं।
पैकेजिंग से ई-कॉमर्स तक होगी तैयारी
सरकार केवल जीआई टैग तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पैकेजिंग, गुणवत्ता मानकों, कोल्ड चेन, प्रोसेसिंग और विपणन व्यवस्था को भी मजबूत करेगी। इन उत्पादों को बड़े शहरों के साथ-साथ ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है। इस अभियान में जीविका दीदियों, स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और पशुपालक समितियों को भी जोड़ा जाएगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर पैदा होंगे।
पशुपालकों को मिलेगा सीधा लाभ
सरकार का मानना है कि चंपारण मटन और बकरी के दूध की सफल ब्रांडिंग से राज्य के हजारों पशुपालकों को सीधा लाभ मिलेगा। इससे पशुपालन अधिक लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। जीआई टैग मिलने पर इन उत्पादों की अलग पहचान बनेगी, नकली उत्पादों पर रोक लगेगी और उत्पादकों को बेहतर कीमत मिल सकेगी।
कॉम्फेड करेगा बकरी के दूध का संग्रह और विपणन
बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड (कॉम्फेड) बकरी के दूध का संग्रह, प्रोसेसिंग और विपणन करेगा। इसके लिए गोट फेडरेशन के गठन की तैयारी की जा रही है। प्रस्ताव को जल्द ही राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। योजना के तहत प्रखंड, प्रमंडल और राज्य स्तर पर गोट फेडरेशन बनाए जाएंगे। पहले चरण में 200 मिलीलीटर और 500 मिलीलीटर की पैकिंग में बकरी का दूध बाजार में उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही बकरी के दूध से तैयार अन्य मूल्यवर्धित उत्पाद भी उपभोक्ताओं तक पहुंचाए जाएंगे।

