
रांची। झारखंड में निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनाने के उद्देश्य से झारखंड सरकार ने औद्योगिक एवं निवेश प्रोत्साहन नीति-2026 का मसौदा तैयार कर आनलाइन प्लेटफार्म पर देते हुए इस पर हितधारकों से सुझाव मांगे हैं। ड्राफ्ट में नए उद्यमियों के लिए कई सुविधाओं का जिक्र किया गया है और कोशिश की गई है कि इसके माध्यम से राज्य में औद्योगिक गतिविधियों को रफ्तार मिले। इसके माध्यम से राज्य को एक अग्रणी औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रस्तावित नीति में लघु कुटीर एवं मध्यम उपक्रमों को झारखंड में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सब्सिडी की राशि में वृद्धि की गई है।



एमएसएमई के लिए 15 से 30 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी का प्रस्ताव दिया गया है ताकि निवेश बढ़ सके। राज्य सरकार इसके माध्यम से विजन-2050 को लेकर भी तैयारी कर रही है। नई नीति में झारखंड में एक लाख करोड़ रुपये के निवेश और 25 हजार नौकरियों के सृजन का लक्ष्य रखा गया है। इसका उद्देश्य राज्य को न केवल खनिज-आधारित उद्योगों के लिए, बल्कि विनिर्माण, खाद्य प्रसंस्करण, कपड़ा, आटोमोबाइल और आइटी जैसे क्षेत्रों के लिए भी एक पसंदीदा निवेश स्थल बनाना है।
झारखंड में लगनेवाली नई औद्योगिक इकाइयों को व्यापक परियोजना निवेश सब्सिडी दी जाएगी। एमएसएमई इकाइयों के लिए स्थिर पूंजी निवेश का 20 प्रतिशत (अधिकतम 15 करोड़ रुपये) और गैर-एमएसएमई इकाइयों के लिए 25 प्रतिशत (अधिकतम 30 करोड़ रुपये) सब्सिडी दी जाएगी।
एसससी और एसटी उद्यमियों के साथ-साथ महिलाओं एवं दिव्यांग उद्यमियों के लिए पांच प्रतिशत का अतिरिक्त लाभ देने का का भी प्रविधान है। इसके अलावा सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों से लिए गए ऋण पर ब्याज में पांच प्रतिशत सब्सिडी मिलेगी।
एसजीएसटी प्रोत्साहन के तहत नई एमएसएमई इकाइयों को पांच वर्षों के लिए शत-प्रतिशत नेट स्टेट जीएसटी की प्रतिपूर्ति मिलेगी, जबकि बड़ी, मेगा और अल्ट्रा-मेगा परियोजनाओं को क्रमशः सात, नौ और 12 वर्षों के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा।दावोस में करार का असर: वर्ष 2026 में ही जनवरी माह में झारखंड ने विश्व आर्थिक मंच में अपनी पहली उपस्थिति दर्ज कराई, जहां टाटा स्टील से 11 हजार करोड़ रुपये के ग्रीन स्टील निवेश की पुष्टि और कई रणनीतिक साझेदारियों पर चर्चा की गई।
दावोस में हुई बैठकों के दौरान करारों का असर अब देखने को मिलेगा। इसके माध्यम से अब झारखंड सरकार ”विजन-2050” के लिए नीतियों को अंतिम रूप देने जा रही है। उद्योग जगत को इस नीति से बड़ी उम्मीदें हैं, लेकिन व्यापार करने में आसानी और नियामकीय अनुपालन को लेकर चिंताएं भी हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में उद्योग क्षेत्र के लिए 541.30 करोड़ रुपये आवंटित है, जो कि पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है।
