पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 74 बसंत देख चुके हैं। बिहार के युवाओं ने नीतीश कुमार पर भरोसा जताया है। नीतीश कुमार ने इस बार एमवाई (महिला+युवा) के फार्मूले पर फोकस किया और महागठबंधन पूरी तरह इसमें फंस कर हार गया। बिहार में 1.77 करोड़ से अधिक युवा मतदाता हैं। इनमें 14.84 लाख ने पहली बार मतदान किया। राजनीतिक दलों ने शिक्षा, रोजगार जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर युवाओं को आकर्षित करने के लिए सोशल मीडिया और जनसभाओं का सहारा लिया। नीतीश ने 5 लाख से ज्यादा नौकरियां दीं—शिक्षक, पुलिस, स्वास्थ्य कर्मी। हर सभा में वे कहते,’जाकर अपने घर वालों से पूछो, जंगलराज में क्या होता था? जंगलराज बनाम सुशासन का नैरेटिव इस बार युवाओं के बीच भी चला।

सोशल मीडिया पर कैम्पेन चलाया गया। चुनाव प्रचार के दौरान मौसम खराब होने के कारण हेलीकॉप्टर नहीं उड़ पाया तो नीतीश कुमार सड़क मार्ग से ही प्रचार करने निकल गए। उन्होंने सबसे अधिक रैली और चुनावी सभाएं की। इससे उनके स्वास्थ्य पर सवाल उठाने वालों को बड़ा जवाब मिला। महागठबंधन ने अपने घोषणापत्र में सरकार बनने के 20 दिनों के अंदर हर परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने के लिए एक कानून लाने का वादा किया था। साथ ही, 20 महीनों के भीतर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है। वहीं, एनडीए ने इस वादे को झूठ का पुलिंदा करार दिया है। एनडीए के नेताओं ने चुनाव प्रचार के दौरान ये कहा कि, 2005 से पहले जब उनके माता-पिता की सरकार थी, तब उन्होंने कितना पलायन रोका था? उन्होंने कहा कि तब बिहार में कानून व्यवस्था बहुत खराब थी। महागठबंधन ने लंबे चौड़े वादे तो किये लेकिन वो वादों का पूरा करने का रोड मैप और ब्लूप्रिंट दे पाने में असफल रहे। ऐसे में युवाओं को महागठबंधन का नौकरी रोजगार का वादा अव्यवहारिक और हवाहवाई लगा। बिहार के युवाओं ने नीतीश कुमारपर भरोसा जताया है, क्योंकि उनके नेतृत्व में उन्हें एक बेहतर और सुरक्षित भविष्य की गारंटी मिली है।

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