
नई दिल्ली ।इस्राइल के ऑपरेशन राइजिंग लायन का एक विडियो वायरल है जिसमें इस्राइल के फाइटर जेट एफ-16 को बीच हवा में रीफ्यूल किया जा रहा है। यह वीडियो सीरिया के आसमान का है। कहा जा रहा है कि ईरान पर अटैक के बाद वापसी के दौरान इस फाइटर जेट में मिड एयर फ्यूल डाला गया। हवा में एयर रिफ्यूल करना बेहद ही चुनौतीपूर्ण काम होता है।



क्या और कैसे होती है मिड एयर रीफ्यूलिंग
मिड एयर रीफ्यूलिंग मतलब फाइटर जेट में दूसरे विमान से उड़ान के दौरान ही ईंधन भरा जाता है। इससे उसकी उड़ान अवधि लंबी हो जाती है और इसकी रेंज बढ़ जाती है। लंबी दूरी के मिशन के लिए यह अहम है। इसमें टैंकर विमान से फाइटर जेट में ईंधन भरा जाता है। मतलब मिड एयर रीफ्यूलिंग में दो विमान शामिल होते हैं, एक टैंकर विमान और दूसरा फाइटर जेट (जिसमें फ्यूल भरा जा रहा है)। मिड एयर रीफ्यूलिंग के दौरान टैंकर विमान से एक होज (लचीली पाइप) निकता है और उसमें एक फनल जैसी संरचना होती है और फाइटर जेट से भी एक पाइप निकलता है और ये दोनों एक दूसरे में फिट होते हैं।
एक बार ये कनेक्ट हो गए तो फिर टैंकर से फाइटर जेट में फ्यूल ट्रांसफर होता है। इसके लिए दोनों एयरक्राफ्ट को एक निश्चित ऊंचाई में उड़ना होता है जो आम तौर पर 20-30 हजार फीट होती है और दोनों की स्पीड एक जैसी होनी चाहिए। आम तौर पर फ्यूल ट्रांसफर की स्पीड 2 से 6 हजार पाउंड प्रति मिनट होती है। वैसे ये अलग अलग सिस्टम पर निर्भर करता है। फ्यूल ट्रांसफर होने के बाद फिर ये दोनों अलग हो जाते हैं। रीफ्यूलिंग के दौरान टैंकर और रिसीवर विमान एक दूसरे से कुछ मीटर की दूरी पर ही होते हैं। जिससे टकराने का खतरा भी रहता है। दोनों एक ही स्पीड में एक ही ऊंचाई में एक ही दिशा में उड़ना होता है। तेज हवा और टर्बुलेंस के दौरान दिक्कत हो सकती है।

