
अबू धाबी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ शुक्रवार को बातचीत की। इस दौरान मोदी ने कहा कि भारत पश्चिम एशिया में शांति लाने के लिए हर संभव सहयोग देने को तैयार है। वार्ता के बाद दोनों देशों ने ऊर्जा, रक्षा, जहाजरानी और सुपर कंप्यूटर सहित छह क्षेत्रों में सहयोग के समझौते किए हैं। यूएई ने भारत में पांच अरब डॉलर के निवेश की घोषणा भी की है। प्रधानमंत्री मोदी और अल नाहयान की मुलाकात मोदी के पांच देशों के दौरे के पहले चरण में यूएई पहुंचने के तत्काल बाद हुई। यूएई के नेता के साथ बैठक की शुरूआत में मोदी ने यूएई पर हाल के हमलों और इसकी संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन करने के प्रयासों की कड़ी निंदा की। मोदी ने कहा, यूएई को जिस तरह से निशाना बनाया गया है, वह अस्वीकार्य है लेकिन यूएई ने जिस तरह से संयम रखते हुए मौजूदा स्थिति को संभाला है वह प्रशंसनीय है।
भारत और यूएई के बीच समझौते : प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि पश्चिम एशियाई संघर्ष का प्रभाव वैश्विक स्तर पर महसूस किया जा रहा है। उन्होंने कहा, भारत पश्चिम एशिया में शांति लाने के लिए हरसंभव सहयोग करने को तैयार है। बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने कुछ महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
ऊर्जा और रक्षा सहयोग : विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा कि भारतीय सामरिक पेट्रोलियम भंडार लिमिटेड (देश के सामरिक पेट्रोलियम भंडार के रखरखाव के लिए जिम्मेदार एक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी) ने अबू धाबी नेशनल आॅयल कंपनी के साथ सामरिक सहयोग के उद्देश्य से एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका लक्ष्य ऊर्जा सुरक्षा, भारत के पेट्रोलियम भंडार को बढ़ाने और तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) और तरल पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) भंडारण केंद्रों पर सहयोग करना है। दोनों नेताओं ने एलपीजी में रणनीतिक सहयोग समझौते पर भी हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य भारत में सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाली रसोई गैस की दीर्घकालिक आपूर्ति, आर्थिक स्थिरता और ऊर्जा साझेदारी है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और यूएई ने रक्षा औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने, नवाचार और प्रौद्योगिकी साझाकरण को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय तथा क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से एक रणनीतिक रक्षा समझौते पर भी हस्ताक्षर किए हैं।
व्यापार और प्रौद्योगिकी पर चर्चा : विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर एक बयान में कहा कि शुक्रवार की चर्चा मुख्य रूप से ऊर्जा, व्यापार और निवेश, नीली अर्थव्यवस्था, प्रौद्योगिकी जिसमें फिनटेक भी शामिल है, रक्षा और जन-संबंधों पर केंद्रित थी। दोनों पक्षों ने पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रम और अन्य वैश्विक मुद्दों पर भी अपने विचार साझा किए। इसमें यह भी कहा गया है कि जहाजरानी और उन्नत प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में भी समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा की। एक महत्वपूर्ण कदम में यूएई ने भारत में पांच अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की है। इससे भारतीय बाजारों और अवसंरचना को मजबूती मिलेगी तथा देश में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। मोदी की इस यात्रा से भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।

