
नई दिल्ली। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रविवार को जनजाति सांस्कृतिक समागम में कहा कि देश के आदिवासी समाज को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से डरने की जरूरत नहीं है। देश के गृहमंत्री होने के नाते वे आश्वासन देते हैं कि जनजातीय समाज को इससे अलग रखा जाएगा। लाल किला में वनवासी कल्याण आश्रम और जनजातीय सुरक्षा मंच की ओर से आयोजित जनजातीय समागम में आज गृहमंत्री शामिल हुए। इसमें देशभर के विभिन्न राज्यों की 500 से अधिक जनजातियों के लोग अपनी पारंपरिक वेशभूषा और वाद्य यंत्रों के साथ शामिल हुए। गृहमंत्री ने दोनों संगठनों की जनजाति समाज को एकजुट करने और उन्हें समाज के अन्य वर्गों से जोड़ने के कार्य की सराहना की। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इस आयोजन को जनजातियों के महाकुंभ के रूप में पहचाना जाएगा।



शाह ने परोक्ष रूप से धर्म परिवर्तन पर निशाना साधा और कहा कि प्रकृति पूजन करने वाला जनजातीय समाज सनातन संस्कृति का हिस्सा है और इसे बचाने का संकल्प लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान राम ने अपने समय में शबरी के झूठे बेर खाकर और निषाद राज के पैर धोकर हमें एकता का संदेश दिया था। उन्होंने कहा कि यह जनजातीय समागम देश के अंदर भेद पैदा करने वाले लोगों के लिए स्पष्ट संदेश है। यह लोग समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड) के नाम पर जनजातीय समाज को डरा रहे हैं कि उन पर पाबंदियां लग जाएगी।
शाह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी सरकार ने पांच दशक की नक्सल समस्या को आज देश से पूरी तरह से खत्म कर दिया है। अब समय जनजातीय समाज के विकास के कार्यों को आगे बढ़ाने का है। अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार में ही अलग से मंत्रालय बनाकर यह काम शुरू हो चुका था और वर्तमान सरकार ने पिछली कांग्रेस सरकारों के मुकाबले बजट में करीब 6 गुना की बढ़ोतरी कर जनजातीय समाज के लिए बड़े स्तर पर काम किया है।
इस दौरान गृहमंत्री अमित शाह ने मध्य प्रदेश सरकार की ओर से लाए गए आदिवासी ग्राम सभाओं को जल, जंगल, जमीन, खनिज और स्थानीय विवाद सुलझाने से जुड़े पेसा कानून कानून की सराहना की और कहा कि यह आइडियल कानून अब भारतीय जनता पार्टी की सरकारों की ओर से आगे बढ़ने का काम किया जाएगा।

