नयी दिल्ली  : राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजीसी) 2024 में अनियमितता: परीक्षापत्र लीक के आरोपों और मेधा सूची में अधिक वृद्धि को लेकर मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लेने के इच्छुक विद्यार्थी यह इम्तिहान फिर से आयोजित करने की मांग रहे हैं।

हालांकि 1563 विद्यार्थियों के कृपांक को रद्द करने के केंद्र के फैसले से उनकी चिंता का पूर्णत: निदान नहीं हो सका है। पेपर लीक और अन्य विसंगतियों की लगातार आ रही खबरों के बीच कई छात्रों का कहना है कि उन्होंने परीक्षा के आयोजन पर से विश्वास खो दिया है।

जबकि कई लोग पेपर लीक के आरोपों की गहन जांच की मांग करते हैं, वहीं कई अन्य लोग सोचते हैं कि 1,563 छात्रों को दिया गया दोबारा परीक्षा का विकल्प महज एक “दिखावा” है।

पश्चिम बंगाल से राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (एनईईटी) की अभ्यर्थी अहेली घोष हाजरा ने पीटीआई को बताया, “अंकों में इतनी बढ़ोतरी है कि 1,563 छात्रों के चयनात्मक पुनर्परीक्षा से इसकी भरपाई नहीं की जा सकती। मुझे लगता है कि प्रत्येक छात्र के अंकों का पुनर्मूल्यांकन एक अच्छी बात होगी, अन्यथा एक सार्वभौमिक पुनर्परीक्षा, लेकिन फिर सरकार को हमें इसके लिए एक से दो महीने का समय देना होगा तैयारी करें।”

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